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काठमांडू/गोरखा: नेपाल एक बार फिर भीषण प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। अगस्त 2026 की विनाशकारी बाढ़ के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि 11 अक्टूबर को गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी ने तबाही मचा दी है। पहाड़ों से आए मलबे और पानी के सैलाब ने बस्तियों, पुलों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।
रविवार तड़के करीब चार बजे चुमनुबरी क्षेत्र में भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी नदी का प्रवाह अचानक रुक गया। कुछ समय बाद जब यह प्राकृतिक अवरोध टूटा, तो पानी और मलबे की एक विशाल लहर नीचे की ओर आई। चुमलिंग और लोकपा के निवासियों ने इस पानी की भीषण गर्जना सुनी और अपनी जान बचाकर ऊंचे स्थानों की ओर भागे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, चार पुल बह गए हैं और कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
प्रारंभिक सूचनाओं में लापता लोगों की संख्या को लेकर असमंजस है, लेकिन राहत दलों ने अब तक 49 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। प्रशासन ने नदी के निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। गंडक नदी प्रणाली भारत के बिहार से जुड़ी हुई है, इसलिए नेपाल के ऊपरी हिस्सों में हो रही यह हलचल भारत के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।
अक्टूबर की यह घटना अगस्त 2026 की उस त्रासदी की याद दिलाती है, जिसने नेपाल की कमर तोड़ दी थी। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त की बाढ़ में 1,453 लोगों की मौत हुई और 5,285 लोग लापता हो गए थे। उस आपदा में नेपाल को करीब 1.66 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष भौतिक नुकसान हुआ, जिसका 83 प्रतिशत हिस्सा केवल सड़कों और पुलों जैसे बुनियादी ढांचे का था।
नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती भौगोलिक है। हिमालय दुनिया की सबसे युवा पर्वत शृंखला है, जो लगातार भूकंपीय गतिविधियों और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पहाड़ों में बेतहाशा निर्माण, बिना सुरक्षा मानकों के सड़कें बनाना और नदियों के बहाव में छेड़छाड़ आपदा के जोखिम को कई गुना बढ़ा रही है।
नेपाल की नदियाँ भारत की गंगा प्रणाली का आधार हैं। हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली भूगर्भीय घटनाएं सीमाओं को नहीं मानतीं। नेपाल की यह आपदा भारत के हिमालयी राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम—के लिए एक बड़ी चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि हिमालयी क्षेत्र में आने वाली परियोजनाओं के निर्माण में केवल विकास को नहीं, बल्कि प्रकृति की सीमाओं और आपदा प्रबंधन की वैज्ञानिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
नेपाल के सामने आज चुनौती केवल उजड़ी बस्तियों को फिर से बसाने की नहीं, बल्कि एक ऐसे सुरक्षित विकास मॉडल को अपनाने की है, जो हिमालय की नज्ज़ को समझ सके। अन्यथा, हर बड़ी आपदा के बाद शोक व्यक्त करना ही एकमात्र विकल्प बनकर रह जाएगा।
Nepal s National Disaster Risk Reduction and Management Authority tweets, A large flood is coming from Chumanuwmi Rural Municipality-6 of the Budhi Gandaki River, so until the flood passes, do not go near the river up to Trishuli Dobhan. Stay in high places.
— ANI (@ANI) October 11, 2026
(Source: Nepal… pic.twitter.com/hEJgccZg1H
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