खैबर पख्तूनख्वा में राजनीतिक भूचाल: सीएम गिरफ्तार, प्रांत में आपातकाल और इमरान समर्थकों का आक्रोश
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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हालात बेहद विस्फोटक हो गए हैं। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के गढ़ माने जाने वाले इस प्रांत में सरकार ने आपातकाल लगा दिया है। राजनीतिक उठापटक के बीच सरकार ने मुख्यमंत्री मुहम्मद सोहेल अफरीदी को गिरफ्तार कर लिया है।

नेताओं की गिरफ्तारी और अपहरण के आरोप PTI ने आरोप लगाया है कि केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि विधानसभा स्पीकर बाबर सलीम स्वाति और पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर खान का भी अपहरण कर लिया गया है। पार्टी के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में नेशनल और प्रांतीय असेंबली के कई सदस्यों को गायब किया गया है, जिससे राजनीतिक माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना हुआ है।

प्रांतीय सरकार बर्खास्त: अब गवर्नर का शासन पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार को भंग कर दिया गया है। उन्होंने इसके पीछे कानून-व्यवस्था की बदहाली और आतंकवाद की घटनाओं में वृद्धि को कारण बताया। अब प्रांत का प्रशासन सीधे गवर्नर के हाथों में होगा, जो एक एडवाइजरी काउंसिल की मदद से काम करेंगे।

इमरान खान की रिहाई की मांग और लॉन्ग मार्च इमरान खान के हजारों समर्थक उनकी रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। अगस्त 2023 से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के समर्थक खराब आर्थिक स्थिति और राजनीतिक दमन के खिलाफ सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में सरकार के साथ हुई बातचीत विफल होने के बाद समर्थकों ने राजधानी की ओर लॉन्ग मार्च शुरू करने का फैसला किया था।

पूरे प्रांत में लॉकडाउन जैसे हालात प्रांत की राजधानी पेशावर में भारी सुरक्षा बल तैनात हैं। इंटरनेट सेवाओं में कटौती और सार्वजनिक परिवहन ठप होने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़कें पूरी तरह बंद हैं और यह कदम पश्तून जनता के जनादेश का अपमान है।

सरकार और विपक्ष का आमना-सामना प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय ने इसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लापरवाही बताया है। वहीं, PTI चेयरमैन गौहर अली खान ने इसे गैर-लोकतांत्रिक और खतरनाक राजनीतिक गलती करार दिया है। इमरान खान ने पहले ही सेना पर उन्हें सत्ता से हटाने की साजिश का आरोप लगाया है, जबकि सेना किसी भी राजनीतिक दखल से इनकार करती रही है।

फिलहाल, खैबर पख्तूनख्वा की स्थिति पर पूरे पाकिस्तान की नजर है। आपातकाल और प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद हिंसा और प्रदर्शनों के और तेज होने की आशंका बनी हुई है।

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