विमान के अंदर पुलिस का ऑपरेशन : क्या महिला अधिकारियों को चुनना महज संयोग था या कोई सोची-समझी रणनीति?
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दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई से आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट जैसे ही दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी, पुलिस ने विमान के भीतर घुसकर तीनों नेताओं—अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका—को हिरासत में ले लिया।

विमान के अंदर महिला पुलिस की मौजूदगी इस कार्रवाई की सबसे चर्चित बात यह रही कि नेताओं को हिरासत में लेने के लिए पुरुष के बजाय महिला पुलिस अधिकारियों की टीम को भेजा गया। विमान के संकरे गलियारों के बीच करीब एक दर्जन महिला पुलिसकर्मियों को इन नेताओं को घेरते हुए देखा गया। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कोई कारण नहीं बताया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह संभावित टकराव को टालने की एक कोशिश हो सकती है।

टकराव से बचने की कोशिश? हवाई जहाज के भीतर जगह बहुत कम होती है, जहाँ जरा सी धक्का-मुक्की या हाथापाई बड़े हंगामे में बदल सकती है। पुलिस शायद उस स्थिति से बचना चाहती थी जहां पुरुष अधिकारी नेताओं को पकड़ें और स्थिति बिगड़ जाए। माना जा रहा है कि महिला अधिकारियों की तैनाती सॉफ्ट हैंडलिंग के उद्देश्य से की गई थी, ताकि विमान में मौजूद अन्य यात्रियों को असुविधा न हो।

पुराने आरोपों का साया पुलिस की इस रणनीति के पीछे CJP द्वारा अतीत में लगाए गए गंभीर आरोप भी एक वजह हो सकते हैं। 20 जुलाई को हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान CJP ने आरोप लगाया था कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की थी। इन आरोपों के कारण पुलिस इस बार किसी भी विवाद से बचने के लिए बेहद सतर्क नजर आई।

ऐसा तो इंदिरा गांधी ने भी नहीं किया था हिरासत में लिए जाने के दौरान अभिजीत दीपके ने पुलिस की इस कार्रवाई को तानाशाही करार दिया। उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड करते हुए कहा, आप देख सकते हैं कि देश किस ओर जा रहा है, वे हमें सीधे फ्लाइट से गिरफ्तार करने आए हैं। ऐसा तो इंदिरा गांधी के दौर में भी नहीं हुआ था। नेताओं ने गिरफ्तारी के दौरान इंकलाब जिंदाबाद और भारत माता की जय के नारे लगाए।

क्या थी गिरफ्तारी की मुख्य वजह? CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। मुंबई से दिल्ली पहुंच रहे इन नेताओं को उम्मीद थी कि वे प्रदर्शन में शामिल होंगे, लेकिन विमान लैंड होते ही पुलिस ने उनके प्लान को नाकाम कर दिया। फिलहाल, पुलिस की यह रणनीति चर्चा का विषय बनी हुई है कि क्या वास्तव में महिला अधिकारियों का चयन किसी ठोस योजना का हिस्सा था या केवल एक मजबूरी।

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