एलन मस्क का बड़ा धमाका: अंबानी पर साधा निशाना, शिवसेना को ₹25 करोड़ चंदे के दावों से मचा हड़कंप
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भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में एंट्री की कोशिश कर रहे स्पेस-X के प्रमुख एलन मस्क ने उद्योगपति मुकेश अंबानी और मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मस्क के हालिया पोस्ट ने न केवल कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी उबाल ला दिया है।

मस्क ने सीधे अंबानी को घेरा

एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए मुकेश अंबानी को भारत का असली मालिक तक कह दिया। मस्क ने पूछा कि जब स्टारलिंक दुनिया के 165 देशों में सफलतापूर्वक काम कर रहा है और भारत के सभी नियमों का पालन कर रहा है, तो फिर भारत में लाइसेंस देने में देरी क्यों की जा रही है?

शिवसेना-भाजपा को मिला चंदे का विवाद

विवाद तब और गहरा गया जब मस्क ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए सनसनीखेज दावा किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस से जुड़ी कंपनी क्विक सप्लाई ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भाजपा को 385 करोड़ और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 25 करोड़ रुपये का चंदा दिया। मस्क द्वारा इन रिपोर्ट्स को साझा करने के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

महाराष्ट्र में बढ़ेगा राजनीतिक दबाव

इस खुलासे के बाद उद्धव ठाकरे गुट और विपक्षी दल शिंदे सरकार पर हमलावर हो सकते हैं। चंदे की इस राशि और रिलायंस के प्रभाव को लेकर विपक्षी दल अब महायुति सरकार से तीखे सवाल पूछने की तैयारी में हैं। राज्य की राजनीति में यह मुद्दा आगामी दिनों में बड़ा तूल पकड़ सकता है।

राहुल गांधी की एंट्री

इस विवाद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी कूद पड़े हैं। राहुल ने मस्क के पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा, एलन, भारत में आपका स्वागत है। उस दूसरे व्यक्ति के बारे में जानने का इंतजार करें। मस्क ने राहुल के इस जवाब पर सहमति जताते हुए इसे चिंताजनक बताया है। जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी का इशारा गौतम अडानी की ओर था।

क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?

मस्क ने तीखे शब्दों में कहा है कि क्या अंबानी भारत के महान लोगों का एकाधिकारवादी शोषण जारी रखना चाहते हैं? मस्क का तर्क है कि स्टारलिंक से भारत के उन दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंचेगा, जहां आज भी कनेक्टिविटी का अभाव है। उन्होंने साफ किया कि स्टारलिंक बच्चों की शिक्षा और छोटे व्यापारियों के लिए मददगार साबित हो सकता है।

सरकार की ओर से फिलहाल यही रुख अपनाया गया है कि नियम सभी कंपनियों के लिए समान हैं और प्रक्रिया के तहत ही लाइसेंस दिए जाएंगे। लेकिन इस विवाद ने डिजिटल क्रांति और देश की बड़ी कंपनियों के बीच के इस टकराव को सार्वजनिक कर दिया है।

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