नोबेल मिलते ही नवी पिल्लई ने उड़ाया ट्रंप का मजाक, कहा- थोड़ी और ताली बजाएं तो शायद पुरस्कार बांट लूं!
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ओस्लो: साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो गया है। इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए भारतीय मूल की प्रसिद्ध मानवाधिकार विशेषज्ञ और पूर्व संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त नवी पिल्लई के नाम की घोषणा की गई है। इस खबर ने वैश्विक राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के दावों को लेकर।

ट्रंप पर कसा तंज पुरस्कार की घोषणा के बाद 85 वर्षीय नवी पिल्लई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलमार्ड द्वारा साझा किए गए वीडियो में पिल्लई ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा, अगर आप थोड़ी और तालियां बजाएं, तो हो सकता है कि मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ बांट लूं! यह टिप्पणी उन खबरों के बाद आई है जिनमें ट्रंप खुद को नोबेल का प्रबल दावेदार बता रहे थे।

ट्रंप की नाराजगी और नोबेल का दावा नोबेल समिति के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप काफी नाराज दिखे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक वकील की पोस्ट शेयर की, जिसमें पिल्लई को नफरत करने वाला करार देते हुए नोबेल पुरस्कार के अपमान की बात कही गई। दिलचस्प यह है कि ट्रंप ने पत्रकारों से दावा किया कि उन्हें यह पुरस्कार पहले ही मिल चुका है। उन्होंने कहा कि पिछली विजेता मारिया कोरिना मचाडो से अप्रत्यक्ष रूप से इसे प्राप्त कर उन्हें सम्मान मिला है। हालांकि, नोबेल समिति ने साफ कर दिया कि पुरस्कार को न तो किसी को सौंपा जा सकता है और न ही बांटा जा सकता है।

पाकिस्तान की किरकिरी इस घोषणा से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। नोबेल की घोषणा से कुछ घंटे पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि उन्होंने ट्रंप को इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया है। शरीफ ने दक्षिण एशिया में शांति बहाली का श्रेय ट्रंप को देते हुए उनके हस्तक्षेप को ऐतिहासिक बताया था।

भारत का रुख साफ पाकिस्तान के इस दावे पर भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुश्मनी खत्म करने में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। भारत ने हमेशा से ही कश्मीर जैसे मुद्दों को द्विपक्षीय मसला माना है।

क्यों दिया गया नवी पिल्लई को सम्मान? नॉर्वे की नोबेल समिति ने पिल्लई को यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए दिया है। पिल्लई इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की पूर्व जज रही हैं और उन्होंने युद्ध अपराधों व नरसंहार जैसे गंभीर मामलों में दोषियों को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। ओस्लो में पुरस्कार की घोषणा करते हुए समिति ने उनके दशकों के संघर्ष और वैश्विक शांति के प्रति समर्पण की सराहना की।

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