लखनऊ में आज बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि मनाई गई। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ स्थित बसपा कार्यालय में उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बीच एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन भी किया गया। लेकिन इन सबके बीच राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या बसपा अब हाशिये पर जा चुकी है?
सत्ता के शिखर से शून्य तक का सफर एक समय था जब मायावती का नाम दलित उत्थान का पर्याय था। उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर इतिहास रचा था। लेकिन आज स्थिति उलट है। बसपा के पास लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद—चारों सदनों में प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य हो चुका है।
पतन के पीछे मुख्य कारण
अस्तित्व की जंग बहुजन समाज पार्टी इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। मायावती की यह श्रद्धांजलि एक भावुक पल हो सकती है, लेकिन पार्टी की हकीकत बेहद गंभीर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव तक बसपा ने अपनी जमीन दोबारा नहीं बनाई, तो यह पार्टी आने वाले समय में इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।
*#WATCH लखनऊ, उत्तर प्रदेश: बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने BSP के संस्थापक कांशी राम को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। pic.twitter.com/Jvxz8600kZ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 9, 2026
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