अयोध्या दौरे पर पहुंचे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक नया और आक्रामक अंदाज देखने को मिला। पूर्व मंत्री पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में अखिलेश यादव त्रिशूल, डमरू और सुदर्शन चक्र थामे नजर आए। उनकी ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
इंसाफ के लिए सुदर्शनधारी बनने का संदेश कार्यक्रम के दौरान अखिलेश ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ मुखर होने का आह्वान किया। उन्होंने अपनी पंक्तियों के माध्यम से कहा, जब सत्ता करे अत्याचार, वंचितों पर भारी, तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी। यह संदेश सामाजिक न्याय, समानता और युवाओं के हक की लड़ाई को धार्मिक प्रतीकों के साथ जोड़कर पेश करने की सपा की नई रणनीति मानी जा रही है।
रामलला के दर्शन पर स्थिति स्पष्ट अखिलेश यादव ने अयोध्या में भगवान राम के दर्शन करने को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगाया। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपनी टीम के साथ रामलला के दर्शन करने आएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने संकल्प लिया था कि इटावा के सैफई में निर्माणाधीन केदारेश्वर धाम का कार्य पूरा होने के बाद ही वह राम मंदिर जाएंगे। उन्होंने पवन पांडेय को दर्शन की तारीख तय करने के निर्देश भी दिए हैं।
क्या है अखिलेश का केदारेश्वर धाम प्रोजेक्ट? सपा प्रमुख के संकल्प का आधार बना केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण इटावा में हो रहा है। लगभग 50 बीघा में फैले इस मंदिर की वास्तुकला उत्तराखंड के केदारनाथ और तमिलनाडु के बृहदेश्वर मंदिर का मिश्रण बताई जा रही है। अखिलेश इसे अपनी आस्था और संकल्प का बड़ा केंद्र मान रहे हैं।
योगी को चुनाव मैदान में उतरने की चुनौती अयोध्या से अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधा राजनीतिक चैलेंज दिया। उन्होंने योगी को 2027 का विधानसभा चुनाव अयोध्या सीट से लड़ने की चुनौती दी। अखिलेश ने उपहास उड़ाते हुए कहा कि सपा ने तो पवन पांडेय को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है, जबकि भाजपा अभी तक उम्मीदवार तय करने में उलझी हुई है।
सियासी बयानबाजी तेज अखिलेश के इस दौरे और उनके हिंदुत्व वाले अंदाज पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने उन पर निशाना साधते हुए दर्शन न करने और राजनीतिक अवसरवाद के आरोप लगाए हैं। 2027 के चुनाव से पहले अखिलेश का यह सुदर्शनधारी अवतार उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ चुका है।
*मानवता की रक्षा है सामूहिक ज़िम्मेदारी
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 9, 2026
जब भेदभाव के शूल का चुभना रहे जारी
अपमानों का बने निशाना दुखी माँ-नारी
युवाओं के सपनों पर तलवार चले दुधारी
जब सत्ता करे अत्याचार वंचितों पर भारी
तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी! pic.twitter.com/XwwR9e7jd1
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