अयोध्या में अखिलेश यादव का अवतारी रूप: हाथ में त्रिशूल-चक्र, और 2027 के लिए योगी को खुली चुनौती
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अयोध्या दौरे पर पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक नया और आक्रामक अंदाज देखने को मिला। पूर्व मंत्री पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में अखिलेश यादव हाथ में त्रिशूल, डमरू और सुदर्शन चक्र थामे नजर आए। उनकी ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

अन्याय के खिलाफ सुदर्शनधारी बनने का संदेश कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने कविता के माध्यम से सत्ता पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, जब भेदभाव के शूल चुभें, युवाओं के सपनों पर तलवार चले और वंचितों पर अत्याचार हो, तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी। उनके इस आह्वान को सामाजिक न्याय और भाजपा सरकार के खिलाफ सपा की आक्रामक चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

रामलला के दर्शन पर क्या बोले अखिलेश? राम मंदिर दर्शन को लेकर उठ रहे सवालों पर सपा प्रमुख ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपनी टीम के साथ रामलला के दर्शन करने आएंगे। उन्होंने इसका आधार अपने एक संकल्प को बताया। अखिलेश ने कहा कि इटावा के सैफई में निर्माणाधीन केदारेश्वर धाम का कार्य पूरा होने के बाद ही वह अयोध्या में दर्शन करने की अपनी प्रतिज्ञा पूरी करेंगे। उन्होंने पवन पांडेय को दर्शन की तारीख तय करने के निर्देश भी दिए हैं।

केदारेश्वर धाम और अयोध्या का कनेक्शन अखिलेश यादव का केदारेश्वर धाम प्रोजेक्ट, जिसे उन्होंने अपने दर्शन का आधार बनाया है, इटावा में यमुना किनारे करीब 50 बीघा क्षेत्र में बन रहा है। इसकी वास्तुकला केदारनाथ और बृहदेश्वर मंदिर का संगम बताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए सपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पिच पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।

2027 का बिगुल: योगी आदित्यनाथ को दी चुनौती धार्मिक माहौल के बीच अखिलेश यादव ने राजनीतिक पारा भी गर्म कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव अयोध्या सीट से लड़ने की खुली चुनौती दी। सपा ने पहले ही पवन पांडेय को अयोध्या से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है, जिसे लेकर अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा अभी भी अपने उम्मीदवार को लेकर असमंजस में है।

अखिलेश के इस दौरे और उनके सुदर्शनधारी स्वरूप पर भाजपा ने भी पलटवार किया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख के अब तक रामलला के दर्शन न करने पर सवाल उठाए हैं। साफ है कि 2027 के चुनाव से पहले अयोध्या एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है।

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