कांशीराम ने मुझे यूपी की जातिवादी राजनीति की भट्ठी में तपाकर तैयार किया : मायावती का बड़ा संबोधन
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि पर 9 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भावुक और आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु को याद करते हुए उनके संघर्षों और अपने उत्तराधिकारी बनने के सफर पर विस्तार से चर्चा की।

कांशीराम ने मुझे भट्ठी में तपाया मायावती ने कहा कि मान्यवर कांशीराम ने उन्हें यूपी की आक्रामक और जातिवादी राजनीति की भट्ठी में खूब तपाकर इस योग्य बनाया कि वे बहुजन समाज का नेतृत्व कर सकें। उन्होंने दोहराया कि कांशीराम ने उन पर जो विश्वास जताया, उसे वे कभी टूटने नहीं देंगी। मायावती ने स्पष्ट किया कि बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है और उनकी अस्मिता व कल्याण ही सर्वोपरि है।

भारत रत्न की मांग और सरकार पर निशाना बसपा प्रमुख ने केंद्र सरकार से मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग एक बार फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि जिस तरह वीपी सिंह सरकार ने बाबा साहेब को सम्मानित किया था, उसी तरह कांशीराम को भी यह सम्मान मिलना चाहिए। साथ ही, उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी के दौर में फीलगुड का झूठा माहौल बनाया जा रहा है।

2027 चुनाव की तैयारी और आकाश आनंद की सक्रियता कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की उपस्थिति आकर्षण का केंद्र रही। उनके दोबारा सक्रिय होने से युवा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह दिखा। मायावती ने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि बहुजन समाज को सत्ता किसी की मेहरबानी से नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त वोट की ताकत से लेनी है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को तन-मन-धन से जुटने का निर्देश दिया।

संगठन को फिर से खड़ा करने की चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह आयोजन बसपा के लिए अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की एक बड़ी कवायद माना जा रहा है। पिछले कुछ चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में आई गिरावट के बाद कांशीराम की पुण्यतिथि के जरिए बसपा ने न केवल अपने पारंपरिक जनाधार को एकजुट करने की कोशिश की, बल्कि युवाओं को जोड़कर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का स्पष्ट संदेश दिया है।

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