बिहार का गौरव: एशियन पैरा गेम्स में तिरंगा थामेंगे टोक्यो पैरालंपिक चैंपियन प्रमोद भगत
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बिहार के वैशाली जिले के लाल और टोक्यो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाले प्रमोद भगत एक बार फिर देश का मान बढ़ाने के लिए तैयार हैं। प्रमोद भगत को जापान के नागोया में आयोजित होने वाले एशियाई पैरा खेलों के लिए भारतीय दल का ध्वजवाहक चुना गया है।

नागोया में लहराएगा भारत का परचम 18 से 24 अक्टूबर तक नागोया में होने वाले इन खेलों के उद्घाटन समारोह में प्रमोद भगत देश के गौरव का प्रतिनिधित्व करेंगे। वे पैरा टेबल टेनिस स्टार भाविना पटेल के साथ संयुक्त रूप से तिरंगा थामेंगे। हाजीपुर के रहने वाले प्रमोद भगत को यह जिम्मेदारी मिलना बिहार के लिए गर्व का क्षण है।

अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में पहचान प्रमोद भगत का खेल सफर उपलब्धियों से भरा रहा है। इससे पहले वे जकार्ता में आयोजित पैरा एशियाई खेलों और फाजा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। अपनी शानदार खेल प्रतिभा के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

पैरा बैडमिंटन: एक संक्षिप्त परिचय पैरा बैडमिंटन दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए बैडमिंटन का ही एक रूप है। इसने 2020 टोक्यो पैरालंपिक खेलों में पहली बार वैश्विक मंच पर दस्तक दी थी। हालांकि, 1990 के दशक से ही यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला जा रहा है, जिसका संचालन बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) द्वारा किया जाता है। इसकी पहली विश्व चैंपियनशिप 1998 में नीदरलैंड में आयोजित हुई थी।

6 श्रेणियों में होती है प्रतिस्पर्धा दिव्यांग खिलाड़ियों को समान अवसर देने के लिए पैरा बैडमिंटन को 6 मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसमें 2 व्हीलचेयर और 4 स्टैंडिंग वर्ग शामिल हैं:

प्रमोद भगत की यह नई उपलब्धि न केवल उनके करियर के लिए मील का पत्थर है, बल्कि यह आने वाले समय में बिहार और देश के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आसमान छूने का सपना देखते हैं।

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