दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन: भारत में खतरनाक होते हार्ट अटैक और मौत के 5 चौंकाने वाले फैक्ट्स
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दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार सुबह करीब 4:20 बजे उन्हें बेहोशी की हालत में गोवा के मणिपाल अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए CPR समेत हर संभव प्रयास किया, लेकिन सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके निधन ने एक बार फिर भारत में तेजी से बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों और उनसे जुड़ी जानलेवा देरी पर बहस खड़ी कर दी है।

हार्ट अटैक के बाद मौत क्यों है इतनी गंभीर समस्या? नाना पाटेकर का जाना एक बड़ा सदमा है, लेकिन यह घटना दिल की बीमारियों की भयावहता को भी दर्शाती है। भारत में अब हार्ट डिजीज केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रही। ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज (GBD) के अनुसार, भारत में हर साल करीब 28.6 लाख मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं, यानी हर दिन लगभग 7,800 लोग दम तोड़ रहे हैं।

हार्ट अटैक और मौतों को समझने वाले 5 जरूरी फैक्ट्स:

1. भारत में मौतों का आंकड़ा स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक, भारत में होने वाली कुल मौतों में 28.1% का कारण कार्डियोवस्कुलर बीमारियां हैं। इसमें स्ट्रोक और दिल की नसों की बीमारी का हिस्सा 80% है। देश में हर साल 25 लाख से ज्यादा लोग गंभीर (STEMI) हार्ट अटैक का शिकार होते हैं।

2. अस्पताल पहुंचने से पहले ही क्यों हो रही मौतें? हार्ट अटैक में पहला घंटा गोल्डन आवर होता है। अध्ययन बताते हैं कि हार्ट अटैक से जुड़ी 45% मौतें लक्षण शुरू होने के पहले घंटे के भीतर ही हो जाती हैं। AIIMS की एक स्टडी के अनुसार, भारत में आधे से ज्यादा मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं, क्योंकि मात्र 10% मरीज ही पहले घंटे में सही इलाज तक पहुंच पाते हैं।

3. क्या महिलाएं पुरुषों से लंबी उम्र तक सर्वाइव करती हैं? पुराने दावों के विपरीत, आधुनिक भारतीय आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं। एक हालिया स्टडी में हार्ट अटैक के बाद महिलाओं की मृत्यु दर (7.07%) पुरुषों (4.07%) से अधिक पाई गई। इसका बड़ा कारण यह है कि महिलाओं को एंजियोप्लास्टी जैसे जीवन रक्षक इलाज पुरुषों की तुलना में कम और देरी से मिलते हैं।

4. क्या उम्र मौत का सबसे बड़ा फैक्टर है? अध्ययन बताते हैं कि हार्ट अटैक के शिकार पुरुषों की औसत उम्र 57 वर्ष और महिलाओं की 61 वर्ष के आसपास है। हालांकि, कम उम्र की महिलाओं में हार्ट अटैक के बाद 30 दिनों के भीतर मौत का जोखिम समान उम्र के पुरुषों की तुलना में अधिक पाया गया है। यानी अब केवल बुजुर्ग होने का इंतजार करना घातक साबित हो सकता है।

5. इलाज में देरी: Time is Muscle का सिद्धांत भारत में मौत की सबसे बड़ी वजह देरी है। सीने के दर्द को अक्सर लोग गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इलाज में देरी और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने के कारण दिल की मांसपेशियां मरने लगती हैं। डॉक्टर इसे Time is Muscle कहते हैं, जिसका अर्थ है कि शुरुआती 90 मिनट में ब्लड फ्लो ठीक करना अनिवार्य है, वरना रिकवरी असंभव हो जाती है।

नाना पाटेकर का निधन हमें यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कितनी महंगी साबित हो सकती है। दिल के संकेतों को पहचानना और समय पर अस्पताल पहुंचना ही सर्वाइवल की एकमात्र कुंजी है।

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