नई दिल्ली: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ़ॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट की कड़ी निगरानी में आ गए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की हालिया टिप्पणी ने आयोग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोमवार, 5 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि फ़ॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने कभी मंज़ूरी नहीं दी थी। यह टिप्पणी चुनाव आयोग के उस प्रेस नोट के बिल्कुल उलट है, जिसमें 26 सितंबर को दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) के लिए फ़ॉर्म-6 के साथ लगाए गए डिक्लेरेशन को बरकरार रखा है। अदालत ने अब इस मामले में साक्ष्य मांगे हैं कि आख़िर यह बदलाव किसने और किस आधार पर किया।
सुप्रीम कोर्ट में दायर दो अलग-अलग याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए एकतरफा निर्णय लिए। ये याचिकाएं इस खुलासे के बाद दायर की गई हैं कि पिछले साल अक्तूबर से इस साल अगस्त के बीच कम से कम 14 मौकों पर अन्य चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों पर अपने विरोध दर्ज कराए थे।
याचिकाकर्ताओं ने मुख्य रूप से दो बड़ी मांगें रखी हैं:
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत केवल अख़बारों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकती। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने स्पष्ट किया कि वे पहले सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका देंगे। फिलहाल अदालत ने चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर आपराधिक हमला करार देते हुए ज्ञानेश कुमार पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है। वहीं, जयराम रमेश ने दावा किया कि जीन-जेड (Gen Z) मतदाताओं को हटाने के लिए यह बदलाव जान-बूझकर किया गया था।
दूसरी ओर, बीजेपी ने इस स्थिति को संस्थाओं की स्वतंत्रता का प्रमाण बताया है। प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि नोटिस जारी होना इस बात का सबूत है कि देश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं पूरी ईमानदारी से काम कर रही हैं। अब सबकी नज़रें चुनाव आयोग के जवाब पर टिकी हैं कि वह अदालत में इस विरोधाभास को कैसे स्पष्ट करता है।
It is now established beyond doubt that Gyanesh Kumar changed Form 6 illegally and unilaterally.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 5, 2026
This is just one more proof of him abusing his position to help the BJP.
He and everyone else involved in this criminal assault on our democracy will be held accountable. https://t.co/oPwOw12uXd pic.twitter.com/a33eJdPetu
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