आसमान में मौत को दी मात: भारतीय पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी के मुरीद हुए अमेरिकी सांसद
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वाशिंगटन: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने फ्लाईदुबई की उड़ान 1073 के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के असाधारण साहस को सलाम किया है। 30 सितंबर 2026 को हुए एक भयावह आतंकवादी हमले के दौरान, कैप्टन मच्छार ने न केवल अपनी सूझबूझ दिखाई, बल्कि 174 लोगों की जान बचाकर एक मिसाल पेश की। इस बहादुरी के सम्मान में अमेरिकी संसद में एक विशेष प्रस्ताव पेश किया गया है।

क्या हुआ था 30,000 फीट की ऊंचाई पर? 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 में सवार 174 यात्री उस समय दहशत में आ गए, जब विमान के फर्स्ट ऑफिसर ने कॉकपिट के अंदर कैप्टन स्मित मच्छार पर क्रैश एक्स से जानलेवा हमला कर दिया। हमलावर ने विमान के नियंत्रण पर कब्जा करने की कोशिश की, जिसके कारण विमान महज 30 सेकंड के भीतर 14,000 फीट नीचे गिर गया।

घायल होने के बावजूद नहीं मानी हार प्रस्ताव के अनुसार, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने हार नहीं मानी। अपनी बची हुई ताकत से उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोला ताकि ऑफ-ड्यूटी पायलट अंदर आ सकें। इस बीच, विमान में सवार अन्य यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने हमलावर फर्स्ट ऑफिसर को काबू में किया। सूझबूझ के चलते विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया, जिससे सभी यात्री बाल-बाल बच गए।

आतंकी साजिश की पुष्टि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अटॉर्नी जनरल ने 3 अक्टूबर 2026 को इस घटना को एक आतंकवादी कृत्य करार दिया। अमेरिकी सांसद जोश गॉटहाइमर, माइकल मैककॉल और डॉन बेकन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में इस घटना की कड़ी निंदा की गई है। साथ ही, सऊदी अरब और UAE की सरकारों से इस पूरे मामले की त्वरित और गहन जांच की मांग की गई है।


जर्मनी में हड़कंप: देशद्रोह के आरोप में खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख गिरफ्तार

बर्लिन: जर्मनी की सुरक्षा व्यवस्था में उस समय भारी खलबली मच गई, जब फेडरल खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख ऑगस्ट हैनिंग को देशद्रोह के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया।

गुप्त दस्तावेजों का सौदा जांच में सामने आया है कि हैनिंग ने गोपनीय दस्तावेजों को हासिल करने के लिए भारी रकम का भुगतान किया था। आरोप है कि उन्होंने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल एक विदेशी खुफिया एजेंसी के लिए एनालिसिस रिपोर्ट तैयार करने में किया। इस खुलासे के बाद जर्मनी में हड़कंप मच गया है और सरकार ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी है।

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