क्या व्यापार की हर मुसीबत का जिम्मेदार अमेरिका है? जयशंकर ने साफ की भारत की नीति
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में वैश्विक व्यापार और कूटनीति पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया भर में व्यापार को लेकर हो रही समस्याओं के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

अमेरिका पर निर्भरता नहीं, रणनीतिक साझेदारी जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए अमेरिका केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक प्रिंसिपल स्ट्रैटेजिक पार्टनर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ होने वाली प्रस्तावित ट्रेड डील भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है, क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

मल्टी-अलाइनमेंट है भारत का मंत्र अमेरिका के साथ बढ़ती नजदीकियों का मतलब यह नहीं है कि भारत अन्य देशों से दूरी बना रहा है। जयशंकर ने मल्टी-अलाइनमेंट की वकालत करते हुए कहा कि भारत चीन, रूस, यूरोप और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध बनाए रखेगा। भारत किसी एक खेमे में सिमटने के बजाय हर उस देश के साथ काम करेगा जो उसके विकास में सहायक हो।

सिर्फ ट्रेड घाटा देखना काफी नहीं व्यापार नीति पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल व्यापार घाटे को कम करना नहीं है। उन्होंने कहा, असली मुद्दा बाजार तक पहुंच और वहां मौजूद प्रतिबंध हैं। भारत अब ऐसे बाजारों की तलाश में है जो अधिक पारदर्शी हों और जिनकी क्रय शक्ति (purchasing power) अधिक हो।

निर्मला सीतारमण के बयान के बाद अहम स्थिति यह बयान ऐसे समय में आया है जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील अब ऐसी जगह पहुंच गई है जहां आगे लेन-देन की गुंजाइश बहुत कम है। जयशंकर के शब्द बताते हैं कि भले ही अमेरिका के साथ बातचीत जटिल हो, लेकिन भारत अपनी रणनीति को किसी एक देश पर केंद्रित करने के बजाय वैश्विक स्तर पर फैला रहा है।

बदलती दुनिया और 4F की चुनौती अंत में, जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब तेजी से मल्टीपोलर (बहुध्रुवीय) हो रही है। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों के सामने 4F—फूड (भोजन), फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (खाद) और फाइनेंस (वित्त)—की चुनौतियों का जिक्र किया। भारत इन चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी स्वतंत्र और संतुलित व्यापार नीति पर अडिग है।

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