13 करोड़ वोटों की चोरी : गर्जना मोर्चे में एक हुए ठाकरे बंधु, बैलेट पेपर से चुनाव की मांग
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मुंबई में रविवार को ठाकरे परिवार की दो बड़ी शख्सियतें—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—एक मंच पर नजर आईं। गर्जना मोर्चे के जरिए दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट में कथित धांधली को लेकर सत्ता पक्ष पर कड़ा प्रहार किया। इस प्रदर्शन में हजारों लोगों ने शिरकत की।

13 करोड़ वोटों के गायब होने का दावा

उद्धव ठाकरे ने मंच से एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने दावा किया कि देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से चुपचाप हटा दिए गए हैं। उद्धव ने कहा कि यह कोई सामान्य चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के मताधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने पश्चिम बंगाल (30 लाख) और तमिलनाडु (70 लाख) का उदाहरण देते हुए इसे एक बड़ी साजिश करार दिया।

चुनाव आयोग पर हो गया है कब्जा

राज ठाकरे ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर पुराने जख्म हरे किए। उन्होंने कहा कि वे 2017 से ही चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर एक तरह का कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आज बीजेपी सत्ता में है और वह इस व्यवस्था का गलत इस्तेमाल कर रही है, तो कल कोई और पार्टी भी ऐसा कर सकती है, जो लोकतंत्र के लिए आत्मघाती होगा।

बैलेट पेपर की वापसी की मांग

दोनों नेताओं ने एक सुर में मांग की कि मौजूदा वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तुरंत रद्द किया जाए। राज ठाकरे ने साफ कहा कि तकनीक के नाम पर धांधली रोकना मुश्किल है, इसलिए चुनाव को वापस बैलेट पेपर के जरिए कराया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग के मौजूदा कामकाज को तानाशाही के दायरे में रखा।

अदालत की सुनवाई पर भी उठाए सवाल

उद्धव ठाकरे ने पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं का जिक्र किया जिन्होंने अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने सवाल किया कि अगर फैसला मतदाताओं के हक में आता भी है, तो क्या वे अगले ही दिन होने वाले चुनाव में वोट डाल पाने की स्थिति में होंगे? उन्होंने कहा कि यह चुनावी संस्थाओं की विफलता का उदाहरण है।

यह लड़ाई देश और आजादी के लिए है

उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि यह मोर्चा किसी एक दल, जाति या धर्म की लड़ाई नहीं है। उन्होंने इसे देश की आजादी को बचाने का संघर्ष बताया। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया नारे पर तंज कसते हुए ठाकरे ने कहा कि उन्हें विकास से दिक्कत नहीं है, लेकिन देश में तानाशाही को मेक इन इंडिया के नाम पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रदर्शन में कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) समेत कई विपक्षी दलों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता साफ झलक रही थी।

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