मुंबई की सड़कों पर रविवार को एक सियासी नजारा देखने को मिला, जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) ने मिलकर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला। गर्जना मार्च के जरिए दोनों नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बैलेट पेपर की वापसी की मांग राज ठाकरे ने अपनी मांग स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान चुनावी प्रक्रिया पर से जनता का भरोसा उठ चुका है। उन्होंने दो प्रमुख मांगें रखीं: मौजूदा वोटर लिस्ट (SIR) को तत्काल रद्द किया जाए और भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए जाएं। उनका तर्क है कि ईवीएम और मौजूदा सिस्टम में छेड़छाड़ की गुंजाइश है।
छह महीने में 40 लाख वोटर कैसे बढ़े? राज ठाकरे ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच के आंकड़ों पर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि महज छह महीने के अंतराल में मतदाताओं की संख्या में 40 से 60 लाख की भारी बढ़ोतरी कैसे हुई? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि विधानसभा चुनाव में गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला था, तो जनता में उस स्तर का उत्साह क्यों नहीं दिखा? उन्होंने इसे सन्नाटा वाली जीत करार दिया।
सीईसी पर निशाना और पुरानी चेतावनी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कटाक्ष करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष दिखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वह 2018-19 से ही वोट चोरी का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय भी उन्होंने विपक्षी दलों से चुनाव बहिष्कार की अपील की थी क्योंकि चुनावी प्रक्रिया में उन्हें धांधली की बू आ रही थी।
सत्ता जनता तय करे, आयोग नहीं राज ठाकरे ने दो टूक कहा कि देश में कौन सत्ता में बैठेगा, यह तय करने का अधिकार सिर्फ जनता का है, चुनाव आयोग का नहीं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि जनता की आवाज और विरोध प्रदर्शनों को सत्ता में बैठे लोग पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं।
उद्योगपतियों के एकाधिकार पर सवाल सिर्फ चुनावी प्रक्रिया ही नहीं, राज ठाकरे ने केंद्र सरकार और उद्योगपतियों के गठजोड़ पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के एयरपोर्ट, पोर्ट और जंगल जैसे महत्वपूर्ण संसाधन एक ही उद्योगपति को सौंपे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका विरोध उद्योगपतियों से नहीं, बल्कि एक ही पक्ष को लाभ पहुँचाने वाली नीति से है।
इस मार्च ने महाराष्ट्र की राजनीति में चुनाव सुधारों की बहस को फिर से गरमा दिया है। ठाकरे बंधुओं का यह संयुक्त प्रदर्शन आने वाले समय में विपक्षी दलों को चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
#WATCH | Mumbai: Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray leads a joint protest march against the Chief Election Commissioner, Gyanesh Kumar.
— ANI (@ANI) October 4, 2026
MNS chief Raj Thackeray is also taking part in the protest. pic.twitter.com/IFdXkwQnfs
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