इस्तीफा नहीं दिया तो बढ़ेगा आंदोलन , मुख्य चुनाव आयुक्त पर चिदंबरम ने बोला बड़ा हमला
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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ जारी घमासान के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दोटूक कहा है कि ज्ञानेश कुमार को हर हाल में इस्तीफा देना ही होगा।

अभी इस्तीफा देना ही बेहतर शनिवार को एक बातचीत के दौरान चिदंबरम ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार का पद पर बने रहना अब मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्हें अंततः इस्तीफा देना ही पड़ेगा। उनके लिए समझदारी इसी में है कि वे अभी स्वेच्छा से पद छोड़ दें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो इंडिया गठबंधन और अन्य समूहों द्वारा किया जा रहा विरोध और अधिक उग्र होगा।

कौन दे रहा है CEC को संरक्षण? जब चिदंबरम से पूछा गया कि आखिर ज्ञानेश कुमार को किसका संरक्षण प्राप्त है, तो उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट है कि कोई न कोई उनका बचाव कर रहा है। सरकार कभी खुद को इससे अलग कर लेती है तो कभी चुनाव आयुक्त के समर्थन में खड़ी नजर आती है। कोई तो है जो उन्हें पद न छोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, लेकिन अंततः उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

अन्य आयुक्तों पर भी नजर चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों, डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी को लेकर चिदंबरम ने कहा कि फिलहाल उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आती है या गैरकानूनी पाई जाती है, तो कांग्रेस उनके इस्तीफे की मांग करने से भी पीछे नहीं हटेगी।

CEOs से सामने आने की अपील चिदंबरम ने राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEOs) से भी आग्रह किया कि वे अब चुप न रहें। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के CEOs ने अपनी बात रखी है, जबकि ओडिशा के CEO ने इस्तीफा दे दिया है। कोर्ट द्वारा तलब किए जाने से पहले वे खुद सामने आएं और खुलासा करें कि उन्हें कौन से निर्देश दिए गए थे और कैसे उन पर अमल करवाया गया।

पूर्व वित्त मंत्री ने दोहराया कि SIR की पूरी प्रक्रिया ही गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि अधिकारी अपनी चुप्पी तोड़ें और बताएं कि क्या उन्होंने इन निर्देशों का विरोध किया था, जिसे चुनाव आयोग ने दरकिनार कर दिया।

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