ओखला लैंडफिल साइट: दिल्ली की मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण, कचरा निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज ओखला लैंडफिल साइट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां चल रहे कचरा निस्तारण (Legacy Waste Management) की जमीनी हकीकत परखी और अधिकारियों के साथ कार्ययोजना की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि काम की रफ्तार को किसी भी स्थिति में धीमा न होने दिया जाए और तय समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा किया जाए।

कूड़े के पहाड़ों से मुक्ति सरकार की प्राथमिकता

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि दिल्ली को वर्षों से परेशान कर रहे कूड़े के पहाड़ों से मुक्त कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। ओखला साइट पर बायोमाइनिंग और बायोरेमेडिएशन के जरिए पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य न केवल कचरे के ढेर को हटाना है, बल्कि इससे निकलने वाली रिसाइकिल सामग्री का उपयोग कर खाली हुई जमीन को दोबारा उपयोग में लाना भी है।

100 एकड़ से अधिक जमीन हुई रिक्लेम

दिल्ली की तीनों प्रमुख लैंडफिल साइटों—ओखला, भलस्वा और गाजीपुर—पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है। अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, तीनों साइटों से लगभग 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया जा चुका है और करीब 100 एकड़ जमीन को कचरे के बोझ से मुक्त (रिक्लेम) कराया जा चुका है। अकेले ओखला में 70 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस कर 35 एकड़ जमीन वापस हासिल की गई है।

नई चुनौतियों का सामना: पुराना और नया कचरा

ओखला साइट पर सबसे बड़ी चुनौती केवल पुराना कचरा हटाना नहीं, बल्कि रोजाना आने वाले नए कचरे का प्रबंधन करना भी है। मानसून के दौरान बारिश के कारण बायोमाइनिंग की गति पर असर पड़ा था, जिससे काम की रफ्तार धीमी हुई थी। मुख्यमंत्री का यह दौरा इसी सुस्ती को खत्म करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से किया गया है।

मिशन मोड में काम करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्ली को कूड़े के पहाड़ों से पूरी तरह मुक्त करने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा। अब सरकार का फोकस न केवल पुराने कचरे को हटाने पर है, बल्कि लैंडफिल पर दोबारा कचरा जमा न हो, इसके लिए नई प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने पर भी है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद ओखला लैंडफिल साइट पर काम की गति कितनी बढ़ती है और तय लक्ष्यों को हासिल करने में प्रशासन कितनी तत्परता दिखाता है।

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