विलागर के एक वीडियो ने बदली तस्वीर, बेंगलुरु के इंदिरा नगर में रातोरात ठीक हुए टूटे फुटपाथ
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सोशल मीडिया की ताकत का असर बेंगलुरु में रहने वाले कनाडाई व्लॉगर कैलेब फ्रीसेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। फ्रीसेन ने हाल ही में अपने वीडियो के जरिए इंदिरा नगर इलाके की बदहाल सड़कों और टूटे हुए फुटपाथों की पोल खोली थी। हैरानी की बात यह है कि वीडियो वायरल होते ही प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मरम्मत का काम शुरू कर दिया है।

क्या था वीडियो में? फ्रीसेन ने अपने वीडियो में इंदिरा नगर की 12वीं मेन रोड की दयनीय स्थिति दिखाई थी। उन्होंने वीडियो में टूटे हुए स्लैब, निर्माण कार्य के मलबे और कचरे से भरे गड्ढों को करीब से दिखाया। व्लॉगर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि भारत की टेक कैपिटल कहे जाने वाले शहर के मुख्य हब में पैदल चलने की ऐसी स्थिति होना वाकई में पैथेटिक (दयनीय) है।

प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही शहर के अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई। फ्रीसेन ने खुद एक्स पर अपडेट देते हुए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन हिस्सों को उन्होंने वीडियो में उजागर किया था, उन्हें फिक्स कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि अभी और मरम्मत का काम बाकी है, जो जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

एरिया इंस्पेक्टर की सराहना व्लॉगर ने इस त्वरित सुधार के लिए एरिया इंस्पेक्टर विजय हरिदास की विशेष रूप से प्रशंसा की। फ्रीसेन वर्तमान में शहर से बाहर हैं, लेकिन उन्होंने अपने सहयोगियों को मौके पर नजर रखने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार सुबह 10 बजे फिर से संबंधित स्थल का निरीक्षण किया जाएगा।

पहले भी हुआ है ऐसा बदलाव यह पहली बार नहीं है जब कैलेब फ्रीसेन की आवाज पर प्रशासन जागा है। इससे पहले, डोमलुर से इंदिरा नगर तक के एक उपेक्षित फुटपाथ, जो पिछले 20 सालों से बंद था, की मरम्मत भी उनके एक वीडियो के बाद ही संभव हो सकी थी। उस समय भी स्थानीय नागरिक समूहों और बीबीएमपी अधिकारियों ने मिलकर काम किया था।

बेंगलुरु की पुरानी समस्या बेंगलुरु में फुटपाथों की बदहाली एक बड़ी समस्या रही है। अतिक्रमण, गड्ढे और मलबे के कारण पैदल चलने वालों को अक्सर जान जोखिम में डालनी पड़ती है। हालांकि, फ्रीसेन जैसे लोगों के प्रयासों और सोशल मीडिया के दबाव के कारण इंदिरा नगर जैसे पॉश इलाकों की सूरत धीरे-धीरे बदल रही है, जो यह साबित करता है कि नागरिक सक्रियता से सकारात्मक बदलाव संभव है।

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