सीजेपी का जेल भरो आंदोलन : मुंबई से ही क्यों शुरू हुई जंग? अभिजीत दीपके ने बताया दिल्ली और महाराष्ट्र का कनेक्शन
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मुंबई से बिगुल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना जेल भरो आंदोलन मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क से शुरू किया है। गांधी जयंती के मौके पर पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद सीजेपी नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे। इस दौरान बॉलीवुड की नामचीन हस्तियों—शबाना आजमी, विशाल ददलानी और विशाल भारद्वाज—ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

क्यों बनी मुंबई आंदोलन की धुरी? सवाल उठ रहा है कि दिल्ली के जंतर-मंतर को छोड़कर मुंबई को क्यों चुना गया? अभिजीत दीपके ने इसका सीधा जवाब महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों में आए अजीबोगरीब बदलाव में दिया है। दीपके का तर्क है कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने मराठी में कहा, दिल्लीची ताकद महाराष्ट्रातूनही टिकते (दिल्ली की सत्ता का आधार महाराष्ट्र भी है)। इसी सियासी संदेश के साथ उन्होंने आंदोलन की शुरुआत मुंबई से की।

क्या है चुनावी गणित का विवाद? सीजेपी ने लोकसभा चुनाव (48 सीटें) और उसके छह महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव (288 सीटें) के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में महायुति के खाते में 17 सीटें आईं, जबकि विधानसभा में यह आंकड़ा उछलकर 230 पर पहुंच गया। पार्टी का दावा है कि इतने कम समय में इतना बड़ा बदलाव संदेह पैदा करता है। हालांकि, चुनाव आयोग स्पष्ट कर चुका है कि सभी फैसले चुनावी नियमों के दायरे में और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

दिग्गजों का समर्थन और तीखे तेवर प्रदर्शन में शामिल अभिनेत्री शबाना आजमी ने इसे संवैधानिक अधिकार का मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, अगर हमसे हमारा वोट ही छीन लिया जाएगा, तो हम चुप कैसे बैठ सकते हैं? वहीं, संगीतकार विशाल भारद्वाज ने अपनी व्यक्तिगत भागीदारी पर कहा कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि हालात इतने खराब हैं कि उन्हें दो महीने के भीतर दूसरी बार सड़कों पर उतरना पड़ा है।

आगे की राह: दिल्ली तक का सफर यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा। दीपके ने योजना साझा की कि मुंबई के बाद सीजेपी गोवा, कोलकाता और बेंगलुरु में प्रदर्शन करेगी। अंत में, यह आंदोलन वापस दिल्ली पहुंचेगा और जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर धरना दिया जाएगा। पार्टी की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। इसके साथ ही, वे 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने और चुनाव प्रक्रिया में नागरिक समाज की भागीदारी की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन की सख्ती और मैं फिर आऊंगा वाला जवाब शिवाजी पार्क में कानूनी पाबंदियों के कारण मुंबई पुलिस ने आंदोलन की अनुमति नहीं दी थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चेतावनी दी थी कि प्रदर्शनकारियों को जेल में रहना पड़ सकता है। इस पर अभिजीत दीपके ने मुख्यमंत्री के ही मशहूर डायलॉग मैं फिर आऊंगा के अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि अनुमति न मिलने पर ही इसे जेल भरो का रूप दिया गया है। 2 अक्टूबर की तारीख को उन्होंने गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ते हुए अपनी मुहिम को प्रतीकात्मक मजबूती दी है।

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