UPSC के 100 साल: पीएम मोदी ने जारी किया स्मारक सिक्का, कैप्टन स्मित की बहादुरी पर दुनिया को है गर्व
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने UPSC की 100 वर्षों की यात्रा को चिह्नित करने के लिए एक विशेष डाक टिकट, एक यादगार सिक्का और एक पुस्तक जारी की।

UPSC: एक सदी का अटूट भरोसा अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में सरकारें बदलीं, तकनीक बदली और परीक्षा के पाठ्यक्रम में भी बदलाव आए, लेकिन UPSC की विश्वसनीयता पर जन-विश्वास आज भी अटूट है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान देश को ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी देने में लगातार अहम भूमिका निभा रहा है।

कैप्टन स्मित की वीरता का उल्लेख कार्यक्रम की शुरुआत में पीएम मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित ने जिस धैर्य और सूझ-बूझ का परिचय दिया, उसने एक भीषण त्रासदी (9/11 जैसी घटना) को टाल दिया। उन्होंने बताया कि उनकी इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से भी इस विषय पर बात हुई है, जिन्होंने भारतीय कैप्टन की बहादुरी की प्रशंसा की है।

परिवार से की बात पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्र भाई, माता गीता बेन और पत्नी सोनल से फोन पर बात की है। फिलहाल कैप्टन स्मित का इलाज चल रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करने और उनकी बहादुरी का सम्मान करने की अपील की।

UPSC का गौरवशाली सफर गौरतलब है कि 1924 में ली कमीशन की सिफारिशों के बाद 1 अक्टूबर 1926 को भारत में पहले पब्लिक सर्विस कमीशन का गठन हुआ था, जिसकी अध्यक्षता सर रॉस बार्कर ने की थी। तब से लेकर आज तक, यह संस्था लाखों युवाओं के सपनों को आकार दे रही है।

दो दिवसीय कार्यक्रम यह शताब्दी समारोह दो दिनों तक चलेगा। इसमें देशभर के स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन, सदस्य, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और प्रख्यात शिक्षाविद भाग ले रहे हैं। यह कार्यक्रम न केवल UPSC की विरासत का जश्न है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका को सम्मान देने का एक माध्यम भी है।

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