उत्तराखंड में सड़कों का बिछा जाल: 51 हजार किमी के पार पहुंचा नेटवर्क, CM धामी ने बताया विकसित उत्तराखंड का आधार
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उत्तराखंड में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जानकारी दी है कि राज्य का कुल सड़क नेटवर्क अब 51 हजार किलोमीटर के आंकड़े को पार कर गया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और डबल इंजन सरकार के प्रयासों का परिणाम बताया है।

सड़कें जो बदल रही हैं पहाड़ों की तस्वीर पहाड़ी राज्य होने के नाते उत्तराखंड में सड़कों का महत्व केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। ये सड़कें गांवों को बड़े बाजारों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और पर्यटन स्थलों से जोड़ने की जीवनरेखा हैं। 51 हजार किलोमीटर का यह विस्तार राज्य के बुनियादी ढांचे में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।

ग्रामीण इलाकों पर विशेष जोर: PMGSY की भूमिका राज्य में सड़क नेटवर्क के विस्तार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की अहम भूमिका है। केंद्र सरकार की मदद से उन बस्तियों तक सड़क पहुंचाई जा रही है जो अब तक अलग-थलग थीं। जनवरी 2026 में केंद्र ने 10 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिससे हजारों बस्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने की योजना है। 2026-27 के लिए भी सैकड़ों किलोमीटर सड़क निर्माण और छोटे पुलों का लक्ष्य रखा गया है।

बड़े प्रोजेक्ट्स: देहरादून बाईपास से सुगम होगा सफर सिर्फ ग्रामीण सड़कें ही नहीं, बड़े शहरों में ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए भी बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। देहरादून का ग्रीनफील्ड बाईपास इसी कड़ी का एक हिस्सा है। करीब 716 करोड़ रुपये की लागत वाला यह 12 किलोमीटर लंबा फोर-लेन प्रोजेक्ट दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को जोड़ेगा, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

पहाड़ों की चुनौतियां और भविष्य की राह उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति सड़क निर्माण के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। भूस्खलन, भारी बारिश और बर्फबारी के बीच सड़कों को टिकाऊ बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि बेहतर सड़कें विकसित उत्तराखंड के संकल्प को नई गति देंगी।

सड़क से आगे: रोपवे और हाईवे पर फोकस कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए सरकार रोपवे जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी दांव लगा रही है। सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट इसका बड़ा उदाहरण है। साथ ही, वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एलिफेंट अंडरपास जैसे सुरक्षा उपाय भी हाईवे परियोजनाओं का अनिवार्य हिस्सा बनाए जा रहे हैं।

अब राज्य के सामने चुनौती केवल सड़क की लंबाई बढ़ाने की नहीं, बल्कि इन सड़कों को सालभर सुरक्षित और सुगम बनाए रखने की है। सुरक्षित और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर ही उत्तराखंड के विकास का असली आधार बनेगा।

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