PoK में गूंजा भारत में मिलाओ का नारा: LoC की तारबंदी हटाने को लेकर मंधोल में उमड़ा जनसैलाब
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मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय सरकार और सेना के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 115 दिनों से जारी इस आंदोलन की चिंगारी अब नियंत्रण रेखा (LoC) के करीब मंधोल इलाके तक पहुंच गई है।

तारबंदी हटाओ, हमें भारत में मिलाओ मंधोल में जुटे हजारों प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भीड़ ने मांग की है कि LoC पर बिछाई गई तारबंदी को तुरंत हटाया जाए और भारत की ओर जाने वाले रास्ते खोले जाएं। प्रदर्शनकारियों के बीच भारत में मिलाओ के नारे साफ तौर पर सुनाई दे रहे हैं, जो क्षेत्र के बदलते मिजाज को दर्शाते हैं।

शहबाज शरीफ और सेना के खिलाफ गुस्सा रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर के खिलाफ खुलकर नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान ने दशकों से PoK के लोगों के राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों का दमन किया है। मंधोल, जो LoC से केवल सात किलोमीटर दूर है, वहां जुटी भीड़ ने पाकिस्तानी सेना के नियंत्रण को सिरे से खारिज कर दिया है।

आर्थिक बदहाली बनी आंदोलन की वजह ज्वाइंट अवामी लीग (JAL) के नेतृत्व में हो रहे इस प्रदर्शन का मुख्य कारण क्षेत्र में व्याप्त महंगाई, बेरोजगारी और संसाधनों की भारी कमी है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पाकिस्तान सरकार ने जानबूझकर आटा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित की है, जिससे जनजीवन नारकीय हो गया है। जून से जारी यह आंदोलन अब एक जन-क्रांति का रूप लेता जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों पर भड़के लोग तनाव के बीच यह भी सूचना मिल रही है कि प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की गाड़ियों का विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पहुंची गाड़ियों पर पथराव की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन PoK में पाकिस्तानी सेना की बढ़ती गतिविधियों ने इलाके में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

सरकार के लिए बड़ी चुनौती 27 जुलाई को हुए स्थानीय चुनावों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने सरकार तो बना ली, लेकिन जनता का बढ़ता आक्रोश उनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। भारत के साथ जुड़ने की उठती मांग ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि इस्लामाबाद की नींद भी उड़ा दी है। फिलहाल, प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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