नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुकी हुई ट्रेड डील अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए बातचीत तेज हो गई है। हालिया चर्चाओं में जिस सबसे अहम मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया गया है, वह है फॉरवर्ड मोस्ट फेवर्ड नेशन (Forward-MFN) का दर्जा।
क्या है फॉरवर्ड-MFN और भारत की मांग? व्यापारिक भाषा में मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का अर्थ है कि व्यापारिक भागीदारों के बीच टैरिफ को लेकर कोई भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, भारत अब फॉरवर्ड-MFN की मांग कर रहा है। इसका मकसद भविष्य में होने वाले बदलावों से भारतीय निर्यातकों को सुरक्षित रखना है।
भारत चाहता है कि अगर भविष्य में अमेरिका किसी अन्य देश के साथ बेहतर टैरिफ समझौते करता है, तो भारत को भी स्वतः ही वही लाभ मिलना चाहिए। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहेगी।
टैरिफ स्थिरता पर विशेष जोर पिछले कुछ समय में टैरिफ नीतियों में अनिश्चितता देखी गई है, जहां अमेरिका के मौजूदा रुख के कारण टैरिफ दरों में तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। इसे देखते हुए भारत ऐसी डील चाहता है जो अमेरिकी प्रशासन के मूड या नीतियों के बदलने पर भी भारतीय हितों को नुकसान न पहुंचाए। भारत चाहता है कि एक बार तय हुए टैरिफ लाभ भविष्य में भी स्थिर रहें।
जयशंकर और गोयल के संकेत विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस डील के बहुत करीब होने का संकेत दिया है। वहीं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां वे द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) और ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने पर चर्चा कर रहे हैं।
डील से क्या बदलेगा? अगर यह डील फाइनल होती है, तो भारतीय निर्यातकों को लंबी अवधि के लिए एक सुरक्षित माहौल मिलेगा। अब तक, ट्रेड डील की राह में कई रुकावटें आई थीं, लेकिन इस बार फ्रेमवर्क में फॉरवर्ड-MFN को शामिल करने का प्रस्ताव भारत के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। फिलहाल, दोनों पक्ष इस पर मंथन कर रहे हैं और जल्द ही एक औपचारिक घोषणा की उम्मीद की जा रही है।
Glad to speak at @AsiaSociety at the end of the #UNHighLevelWeek. Thank @dannyrrussel for the conversation. Highlighted the following points:
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 29, 2026
✅ The difficult state of the world, with multiple conflicts and the 4F (food, fuel, fertiliser & finance) crisis.
✅ The paradox of… pic.twitter.com/KBiGHPwf1e
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