भारत-अमेरिका की नई रक्षा रणनीति: युद्ध अभ्यास 2026 के बाद दिल्ली में सैन्य दिग्गजों की अहम बैठक
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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालातों और उभरती वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत और अमेरिका ने अपने रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने का निर्णय लिया है। हाल ही में नई दिल्ली में भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और अमेरिकी सेना की पैसिफिक कमांड (USARPAC) के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी. वॉवेल के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई।

युद्ध अभ्यास की सफलता से बढ़ा भरोसा

इस बैठक का मुख्य केंद्र हाल ही में राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में संपन्न युद्ध अभ्यास 2026 की अभूतपूर्व सफलता रही। दोनों सैन्य अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि संयुक्त प्रशिक्षण अभियानों ने न केवल सेनाओं के बीच तकनीकी तालमेल को सुधारा है, बल्कि भविष्य में किसी भी साझा अभियान के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार किया है।

इंटरऑपरेबिलिटी पर विशेष जोर

बैठक के दौरान दोनों सेनाओं ने इंटरऑपरेबिलिटी यानी साथ मिलकर काम करने की क्षमता को बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। भारतीय सेना ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए नई संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा सुरक्षा उद्देश्यों को पूरा करना है।

रक्षा तकनीक में बढ़ेगा सहयोग

केवल सैन्य अभ्यास ही नहीं, बल्कि रक्षा उद्योग और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। सोमवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ भी बैठक की। इसमें रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और साझा तकनीक के आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया, ताकि दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच गहरे आपसी भरोसे और साझा लक्ष्यों का प्रतीक है। महाजन रेंज में देखी गई तैयारी और जज्बे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका रक्षा गलियारा वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक अहम पिलर साबित होगा।

यह बैठक यह साफ करती है कि भारत और अमेरिका अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि एक-दूसरे के रणनीतिक पूरक के रूप में तेजी से उभर रहे हैं।

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