पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में आने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। उन्होंने साफ किया है कि वे किसी पारंपरिक राजनीतिक दल से जुड़ने के बजाय सीधे जनता के साथ मिलकर काम करना चाहती हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा है कि उनका मकसद राजनीति की दिशा और दशा बदलना है।
80 सालों का हिसाब चाहिए दिव्या मित्तल ने एक भावुक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि उन्होंने यह फैसला उन लोगों की आवाज बनने के लिए लिया है जिनकी सुनवाई किसी दफ्तर में नहीं होती। उन्होंने कहा, 80 साल की आजादी के बाद भी वंचित वर्ग को उनके हक नहीं मिल रहे हैं। मुझे उन फाइलों का, उन अधूरे स्कूलों का और उन मौतों का हिसाब चाहिए जो व्यवस्था और संवेदनहीनता की भेंट चढ़ गईं।
इरादे की कमी पर निशाना अपनी पोस्टिंग के दौरान के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे एक महिला ने पानी के बजाय अपने गांव में स्कूल की मांग की, लेकिन तीन साल बाद भी नियम और पैसा होने के बावजूद स्कूल नहीं बन सका। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, पैसे या नियमों की कमी नहीं थी, कमी केवल इरादे की थी। अगर इरादा पक्का हो तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं, लेकिन इरादा न हो तो एक फाइल ही पहाड़ बन जाती है।
व्यवस्था में ऊपर कौन है? पूर्व अधिकारी ने सिस्टम की खामियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने उस इंसान का जिक्र किया जिसे जमीन पर पट्टा तो मिला, लेकिन कब्जा दिलाने के नाम पर अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ऊपर से मनाही है । दिव्या ने सवाल किया कि संविधान में जनता सबसे ऊपर है, तो फिर यह ऊपर कौन है जो न्याय को रोक रहा है?
युवाओं और भविष्य की चिंता दिव्या ने आगामी पीढ़ी और युवाओं के भविष्य को लेकर भी गहरी चिंता जाहिर की। पेपर लीक की घटनाओं, बेरोजगारी और AI के दौर में युवाओं के भविष्य पर उठते सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि किसी भी सदन में इन विषयों पर गंभीर चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी राजनीति की जरूरत है जो सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कल की सुरक्षा के लिए सोचे।
मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की चर्चा दिव्या मित्तल अपनी तैनाती के दौरान मिर्जापुर में काफी सक्रिय रही हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वह अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत मिर्जापुर से कर सकती हैं। हालांकि, उन्होंने किसी पार्टी से जुड़ने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, जिन झंडों के नीचे रहकर 80 सालों में हिसाब नहीं बदला, मैं उनके साथ खड़े होकर बदलाव नहीं ला सकती। बदलाव मेरी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश से ही शुरू होगा।
जनता से सीधा संवाद अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी मसीहा का इंतजार न करें, बल्कि खुद जुड़ें। उन्होंने जनता से जुड़ने के लिए एक वॉट्सऐप नंबर (9198956957) भी साझा किया है, ताकि वे उन लोगों की आवाज बन सकें जो बदलाव चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल एक नेता बदलने की नहीं, बल्कि इरादे की राजनीति स्थापित करने की है।
*कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए। pic.twitter.com/mtS6gzBzRw
— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) September 29, 2026
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