महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान: महतारी वंदन से ड्रोन दीदी तक आत्मनिर्भरता की नई गाथा
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छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर तेजी से बदल रही है। राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल दिया है, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक और उद्यमिता से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।

महतारी वंदन योजना: आत्मनिर्भरता की नींव महतारी वंदन योजना राज्य की महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनी है। डीबीटी के जरिए सीधे खाते में मिलने वाली मासिक सहायता ने महिलाओं को छोटी-मोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की मजबूरी से मुक्ति दिलाई है। सरगुजा की राखी जैसी महिलाओं के लिए यह राशि संकट के समय संबल बनी है, जिससे वे अपने बच्चों को पढ़ाने और खुद के हुनर को निखारने का साहस जुटा पा रही हैं।

तकनीक के साथ आसमान छूती ड्रोन दीदी महिला सशक्तिकरण का सबसे आधुनिक चेहरा नमो ड्रोन दीदी के रूप में सामने आया है। ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें कृषि-तकनीक से जोड़ा जा रहा है। जांजगीर-चांपा की हेमलता मनहर जैसी महिलाएं आज खेतों में नैनो उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव करके सालाना 1 से 2 लाख रुपये तक कमा रही हैं, जो सीधे तौर पर आधुनिक तकनीक से उनकी आर्थिक प्रगति को दर्शाता है।

परिवहन में भी महिलाओं का दबदबा दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना ने परिवहन के क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए द्वार खोले हैं। श्रम विभाग में पंजीकृत महिलाओं को ई-रिक्शा के लिए अनुदान दिया जा रहा है। ग्राम झलमला की सेवती ठाकुर इसका एक जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने स्वयं का ई-रिक्शा खरीदकर न केवल अपना परिवहन खर्च बचाया है, बल्कि अपने कैंटीन व्यवसाय को भी सुदृढ़ किया है।

लखपति दीदी अभियान से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था बिहान योजना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से राज्य में लखपति दीदी अभियान एक बड़ा बदलाव ला रहा है। 13 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं इस बदलाव की हिस्सा बन चुकी हैं। कोरिया जिले की कांति साहू ने इसी अभियान से जुड़कर दोना-पत्तल निर्माण और सिलाई जैसे कई काम शुरू किए हैं। आज उनकी सालाना आय 3 लाख रुपये से अधिक है, जो यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और ऋण सुविधा के साथ महिलाएं खुद का बड़ा उद्यम खड़ा कर सकती हैं।

आत्मनिर्भरता का नया भविष्य छत्तीसगढ़ में चल रहे ये प्रयास अब केवल सरकारी सहायता तक सीमित नहीं हैं। यह कौशल, तकनीक और स्वरोजगार के एक बड़े पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के रूप में विकसित हो रहे हैं। खेती से लेकर परिवहन और लघु उद्योगों तक, छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति अब परिवार की आय में केवल सहयोग नहीं कर रही, बल्कि स्वयं आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश की प्रगति की धुरी बन रही है।

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