जमशेदपुर में रात्रि गश्ती के नाम पर पुलिस की गुंडागर्दी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मी सड़क पर मौजूद आम लोगों और दुकानदारों को खदेड़ते और उन पर लाठियां बरसाते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद शहर में भारी आक्रोश है और मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है।
बाबूलाल मरांडी का सरकार पर करारा प्रहार नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधा सवाल पूछा है। मरांडी ने कहा कि अपराध नियंत्रण जरूरी है, लेकिन आम नागरिकों को लाठियों से पीटना किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
अपनी नाकामी छिपा रही पुलिस मरांडी ने आरोप लगाया कि पुलिस अपनी कार्यक्षमता की कमी और नकारेपन को छिपाने के लिए आम जनता को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर लगाम लगाने के बजाय बेगुनाह लोगों पर कार्रवाई करना पुलिस की बौखलाहट को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जनता को प्रताड़ित करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
क्या सरकार राज्य में घोषित करना चाहती है कर्फ्यू? तीखे तेवर अपनाते हुए बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तंज कसा। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार चाहती है कि शाम ढलते ही आम आदमी अपने घरों में दुबक जाए? उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि बेहतर होगा कि पूरे राज्य में शाम 4 बजे के बाद कर्फ्यू लगा दिया जाए, ताकि पुलिस कोयला, बालू और पत्थर की तस्करी करने वाले माफियाओं को बेखौफ सुरक्षा दे सके।
सुरक्षा की मांग, तानाशाही का विरोध अपने बयान में मरांडी ने साफ किया कि पुलिस की प्राथमिकता अपराधियों के खिलाफ सख्ती बरतने की होनी चाहिए, न कि आम जनता के खिलाफ। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। स्पष्ट लहजे में बाबूलाल ने कहा कि, झारखंड की जनता को सुरक्षा की दरकार है, न कि पुलिस की लाठियों की।
इस घटना के बाद से जमशेदपुर के स्थानीय निवासियों में भी रोष है। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या रात्रि गश्ती का मतलब आम नागरिकों का उत्पीड़न करना है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले पर क्या रुख अपनाती है।
*जमशेदपुर में रात्रि गश्ती के वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी दुकानों और सड़कों पर मौजूद लोगों को हटाते और लाठियां चलाते नजर आ रहे हैं। अपराध नियंत्रण जरूरी है, लेकिन आम नागरिकों को पीटना किसी भी स्थिति में समाधान नहीं हो सकता।
— Babulal Marandi (@yourBabulal) September 27, 2026
मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, ये कैसी कार्रवाई है?… pic.twitter.com/Cpm9ieBkej
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