संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अस्थायी सदस्य बनने की दौड़ अब और दिलचस्प हो गई है। ताजिकिस्तान ने 2028-2029 के कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह पहली बार है जब ताजिकिस्तान इस कुर्सी के लिए दावेदारी कर रहा है।
अहम मुकाबला: भारत बनाम ताजिकिस्तान इस दौड़ में भारत पहले से ही अपनी दावेदारी पेश कर चुका है। भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए शांति (SHANTI) थीम के साथ अपना नौवां अभियान चला रहा है। चुनौती यह है कि ताजिकिस्तान को 57 देशों वाले ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का समर्थन प्राप्त है, जिससे मुकाबला कड़ा होने के आसार हैं।
जून 2027 में होगी अग्निपरीक्षा यूएनएससी के अस्थायी सदस्यों का चुनाव जून 2027 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में गुप्त मतदान के जरिए होगा। जीत हासिल करने के लिए किसी भी देश को मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत (कम से कम 129 वोट, यदि सभी 193 सदस्य हिस्सा लें) की आवश्यकता होगी।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता भारत इस चुनाव को लेकर काफी सतर्क है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार खाड़ी देशों, कैरिबियन और अफ्रीकी देशों से संपर्क साध रहे हैं। हालांकि भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों का समर्थन हासिल है, लेकिन ताजिकिस्तान की एंट्री ने वैश्विक गुटबंदियों को नई धार दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई, मिस्र और बहरीन जैसे इस्लामिक देश भारत के पक्ष में खड़े हो सकते हैं।
सुरक्षा परिषद का गणित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। अस्थायी सीटों का वितरण क्षेत्रीय आधार पर होता है। भारत और ताजिकिस्तान दोनों ही एशियाई समूह की सीटों के लिए दावेदार हैं। सुरक्षा परिषद का यह चुनाव न केवल कूटनीतिक कौशल की परीक्षा है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ और अन्य क्षेत्रीय मंचों पर भारत के प्रभाव को भी मापेगा।
भारत का अब तक का सफर भारत सुरक्षा परिषद में आठ बार अस्थायी सदस्य रह चुका है। पिछला कार्यकाल 2021-22 में था। भारत लगातार आतंकवाद-रोधी उपायों, समुद्री सुरक्षा और यूएनएससी में व्यापक सुधारों की वकालत करता रहा है। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर G4 समूह के माध्यम से सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग भी उठाता रहा है।
अब सबकी निगाहें अगले कुछ महीनों में होने वाली कूटनीतिक जोड़-तोड़ पर टिकी हैं, क्योंकि फिलीपींस पर किर्गिस्तान की हालिया जीत ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा परिषद की सीटें अब पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी हो गई हैं।
Tajik Foreign Minister Sirojiddin Muhriddin pitches for his country s bid for non permanent membership for UNSC 2028-29.
— Sidhant Sibal (@sidhant) September 27, 2026
Says, For the first time in his history, Tajikistan is seeking election to UNSC
PS: India is also in fray for 2028 bid. Elections happen in 2027 pic.twitter.com/DbBJYB52VP
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