जिनपिंग के आगे ट्रंप की ‘नरमी’: वाशिंगटन शिखर वार्ता में चीन को मिली बड़ी रणनीतिक बढ़त
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वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने वैश्विक कूटनीति के समीकरण बदल दिए हैं। रेड कारपेट स्वागत के बावजूद, ट्रंप प्रशासन चीन से अपनी कोई भी प्रमुख मांग मनवाने में विफल रहा। इस बैठक से स्पष्ट संकेत मिला है कि बीजिंग अपनी शर्तों पर वार्ता करने और अमेरिका को बराबरी के धरातल पर लाने में पूरी तरह सक्षम है।

व्यापारिक मोर्चे पर चीन को मिली ऑक्सीजन बैठक का सबसे बड़ा नतीजा व्यापारिक युद्धविराम (ट्रेड ट्रूस) के विस्तार के रूप में सामने आया है। नवंबर में खत्म हो रहे टैरिफ ट्रूस को 10 जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया गया है। इससे चीन के निर्यात आधारित उद्योगों को बड़ी राहत मिली है। इसके बदले में चीन ने केवल रेयर-अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई बड़ा आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि केवल समय बिताने की रणनीति है।

ताइवान पर अमेरिका का रुख ढीला? बीजिंग की सबसे बड़ी प्राथमिकता ताइवान के मुद्दे पर चीन का पलड़ा भारी रहा। इस बैठक के दौरान ताइवान के लिए प्रस्तावित 14 अरब डॉलर के हथियार बिक्री पैकेज को मंजूरी नहीं मिल सकी। शी जिनपिंग ने ट्रंप पर ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने का कूटनीतिक दबाव बनाया, जिससे अमेरिकी सीनेट और ताइपे प्रशासन दोनों में बेचैनी बढ़ गई है।

एडवांस चिप और AI: प्रतिस्पर्धा का कोई अंत नहीं भले ही दोनों नेताओं ने सौहार्द दिखाया, लेकिन एडवांस चिप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैन्य प्रभाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद कायम हैं। शी जिनपिंग ने स्पष्ट कहा कि प्रतिस्पर्धा दायरे में होनी चाहिए। वहीं, अमेरिका की ओर से AI के लिए हॉटलाइन जैसे छोटे सुझावों पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन किसी भी प्रकार का बाध्यकारी समझौता नहीं हो पाया।

निष्कर्ष: वाशिंगटन की कोशिशें बेनतीजा आज की स्थिति यह है कि ट्रंप के कड़े तेवरों के बावजूद चीन ने तकनीक, व्यापार और भू-राजनीति के मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। मानवाधिकार, ईरान और सेमीकंडक्टर निर्यात नियंत्रण जैसे विवादित मसलों पर कोई भी नया फॉर्मूला सामने नहीं आया है। यह शिखर वार्ता डोनाल्ड ट्रंप के लिए कूटनीतिक दिखावा बनकर रह गई, जबकि शी जिनपिंग ने विश्व के सामने यह साबित कर दिया कि चीन अब अमेरिका के समकक्ष खड़ा है।

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