यूएनजीए में काला चश्मा पहनकर क्यों बोले नेपाल के पीएम बालेन शाह? जानें इसके पीछे का सच
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जब अपना पहला भाषण दिया, तो दुनिया की नजरें उनके प्रस्ताव पर तो थीं ही, लेकिन उनके सिग्नेचर लुक ने भी सबका ध्यान खींचा। पारंपरिक नेपाली टोपी और काले चश्मे में पहुंचे बालेन शाह इस दौरान हिमालय के जलवायु संकट पर गंभीर चर्चा करते नजर आए।

जलवायु संकट पर रखा बड़ा प्रस्ताव यूएनजीए के मंच से बालेन शाह ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म बनाने का प्रस्ताव पेश किया। इसके तहत नेपाल, भारत और चीन को एक साथ आकर हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की निगरानी और डेटा साझा करने पर जोर देना होगा ताकि जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों से बचा जा सके।

क्यों नहीं उतारते काला चश्मा? रैपर से राजनेता बने बालेन शाह का यह काला चश्मा उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन चुका है। मेयर और फिर प्रधानमंत्री बनने तक, उनका यह स्टाइल उनके समर्थकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। आलम यह है कि नेपाल की ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर बालेन शाह ग्लासेस के नाम से चश्मे बिकते हैं।

उनके कार्यालय की ओर से इस चश्मे के पीछे का एक बड़ा कारण मेडिकल एडवाइस बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें तेज रोशनी से आंखों को बचाने के लिए हर समय चश्मा पहनने की सलाह दी है। यही वजह है कि वे संसद से लेकर विदेशी राजदूतों के साथ तस्वीरों तक में इसे नहीं हटाते।

किन मौकों पर चश्मा उतारते हैं बालेन? हालांकि, बालेन शाह हमेशा चश्मा पहनकर नहीं रहते। अब तक ऐसे तीन मौके आए हैं जब उन्होंने सीधे जनता से जुड़ने के लिए चश्मा उतारा है:

  1. जुलाई में दक्षिणी नेपाल में हुई हिंसक सांप्रदायिक झड़पों के बाद संबोधन के दौरान।
  2. अगस्त में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते वक्त।
  3. समर्थकों के साथ बातचीत के दौरान जब उन्होंने भावुक होकर आई लव यू कहा था।

विवाद और अनुशासन इस स्टाइल को लेकर नेपाल की राजनीति में विवाद भी हो चुका है। अगस्त में नेपाल के स्पीकर ढोल प्रसाद अर्याल ने संसदीय कार्यवाही के दौरान काला चश्मा पहनने पर रोक लगा दी थी। उनका मानना था कि सदन में चश्मा पहनना उचित नहीं है। हालांकि, अपने स्वास्थ्य कारणों और इस खास अंदाज को बरकरार रखते हुए बालेन शाह का सनग्लास लुक आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

लेखक: विक्रम कुमार

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