नोएडा बस हादसा: राजस्थान का फिटनेस, हरियाणा का PUC और बिहार का नंबर; मौत का ‘काली चिट्ठा’ खुल गया
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यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर बस (BR32PA8647) आग का गोला बन गई। इस हादसे में 9 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई। इस भीषण हादसे के बाद बस की जो कुंडली सामने आई है, उसने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक बस, कई राज्यों के दस्तावेज

जांच में पता चला है कि बस का रजिस्ट्रेशन बिहार (मधुबनी) का है। हैरत की बात यह है कि बस का फिटनेस सर्टिफिकेट राजस्थान से लिया गया था, जबकि प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी हुआ था। अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि अलग-अलग राज्यों से इन दस्तावेजों को कैसे मैनेज किया गया और क्या ये कागजी तौर पर ही दुरुस्त थे या तकनीकी रूप से भी?

19 चालान और नियमों की धज्जियां

रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि इस बस पर 19 लंबित चालान हैं और लगभग 1.75 लाख रुपये का जुर्माना बकाया है। इसमें बिना परमिट, ओवरस्पीडिंग, रेट्रोफिटिंग (नियमों के विपरीत बदलाव) और अवैध रूप से फ्यूल बदलने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। जनवरी 2026 में बस को एक कम उम्र का नाबालिग चला रहा था, जिसका भी चालान काटा गया था।

यात्रियों की चेतावनी को किया अनसुना

प्राथमिक जांच और FIR के अनुसार, धुआं उठने के बाद यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर को जलने की बदबू आने की सूचना दी थी। आरोप है कि चालक दल ने यात्रियों की इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। कुछ देर बाद ही एसी से निकली चिंगारी ने इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल को पकड़ लिया और देखते ही देखते पूरी बस आग की चपेट में आ गई।

तकनीकी खामी या लापरवाही?

प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक, आग लगने की शुरुआत एसी में शॉर्ट-सर्किट या ब्लास्ट से हुई। जानकारों का कहना है कि फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद बस की वास्त‌विक स्थिति खतरनाक थी। सवाल यह है कि यदि बस में तकनीकी खामियां थीं, तो उसे फिटनेस प्रमाणपत्र कैसे मिला? क्या फिटनेस केंद्रों पर बसों की तकनीकी जांच सिर्फ कागजों में की जाती है?

फॉरेंसिक जांच से खुलेगा सच

फिलहाल चालक और परिचालक को हिरासत में ले लिया गया है। लेकिन प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या सिस्टम की मिलीभगत का परिणाम? फॉरेंसिक टीम अब बस के जले हुए अवशेषों से यह पता लगाएगी कि आग लगने के वास्तविक कारण क्या थे और क्या बस में सुरक्षा के तमाम मानक मौजूद थे।

इस हादसे ने देश के परिवहन तंत्र में फिटनेस और कागजों के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। 9 लोगों की मौत ने यह साफ कर दिया है कि सड़कों पर मौत के पहिए दौड़ रहे हैं, जिन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

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