शी जिनपिंग का भव्य स्वागत और ट्रंप का विंटर लुक : क्यों चर्चा में है एयरपोर्ट का यह दृश्य?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत करने के लिए प्रोटोकॉल से हटकर कदम उठाया। शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा पर जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे, जहां ट्रंप ने खुद मौजूद रहकर उनकी अगवानी की।

आमतौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का औपचारिक स्वागत व्हाइट हाउस में होता है, लेकिन ट्रंप का एयरबेस पहुंचना दोनों देशों के बीच बदलते समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।

भव्य स्वागत की तस्वीरें शी जिनपिंग के स्वागत के लिए जॉइंट बेस एंड्रयूज पर 100 फीट लंबा रेड कार्पेट बिछाया गया था। 21 जवानों की टुकड़ी ने उन्हें औपचारिक सलामी दी और दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गए। इस दौरान अमेरिकी वायुसेना के दो B-1 बॉम्बर विमानों ने फ्लाईपास्ट कर इस यात्रा की गंभीरता को दर्शाया।

60 डिग्री तापमान में ओवरकोट और दस्ताने स्वागत समारोह के दौरान ट्रंप का पहनावा सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया। उस समय तापमान करीब 60-64 डिग्री फॉरेनहाइट (16-17 डिग्री सेल्सियस) था। इस मौसम में ट्रंप को लंबे ओवरकोट और दस्ताने पहने देख लोग हैरान रह गए।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनके इस विंटर लुक पर तंज कसा। कुछ लोगों ने इसे उनकी शारीरिक कमजोरी से जोड़कर देखा, तो किसी ने इसे अजीब फैशन चॉइस बताया। हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

11 साल बाद चीन का अमेरिका दौरा शी जिनपिंग की यह यात्रा 11 साल बाद हो रही है। 23 से 25 सितंबर तक चलने वाली इस राजकीय यात्रा में व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान, ईरान और महत्वपूर्ण खनिज जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा होगी। दुनिया भर की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापारिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा चरम पर है।

व्यापारिक युद्ध विराम पर सहमति मुलाकात से ठीक पहले, दोनों देशों ने व्यापार को लेकर नरमी दिखाई है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, मौजूदा ट्रेड ट्रूस (व्यापारिक युद्ध विराम) को दो महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। पहले जो समझौता 10 नवंबर को खत्म होना था, वह अब 10 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा।

यह फैसला दोनों देशों को बातचीत के लिए एक महत्वपूर्ण बफर टाइम देता है। इस दौरे में सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि AI और भविष्य की तकनीक पर भी कड़े फैसले लिए जा सकते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे।

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