यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: इमरजेंसी एग्जिट सील और मौत का बारूद बनी स्लीपर बस
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ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर एक निजी स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने 9 लोगों की जान ले ली है। दिल्ली से महोबा जा रही इस बस में हुई मौतों ने परिवहन विभाग और बस संचालकों की लापरवाही की पोल खोल दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह बस एक चलती-फिरती मौत का जाल बनी हुई थी।

इमरजेंसी एग्जिट बंद, नियमों से हुआ खिलवाड़

जांच में खुलासा हुआ है कि बस के डिजाइन में नियमों के विरूद्ध जाकर गंभीर बदलाव किए गए थे। बस में बना इमरजेंसी एग्जिट पूरी तरह से सील था, क्योंकि उसके ठीक सामने स्लीपर बर्थ बना दिए गए थे। आपात स्थिति में किसी भी यात्री के लिए बाहर निकलना नामुमकिन था। यही कारण है कि आग लगने पर यात्री अंदर ही फंसकर रह गए।

लगेज में विस्फोटक पेंट थिनर

सुरक्षा के सभी मानकों को ताक पर रखकर बस के लगेज कम्पार्टमेंट में पेंट थिनर जैसे ज्वलनशील पदार्थ ले जाए जा रहे थे। आग लगने के बाद इसी ज्वलनशील पदार्थ ने आग को चंद मिनटों में विकराल रूप दे दिया। यह स्पष्ट उल्लंघन है कि एक यात्री बस में इतने खतरनाक रसायनों को कैसे ले जाने दिया गया।

यात्रियों की चेतावनी को किया अनसुना

पीड़ित यात्रियों का आरोप है कि जेवर के पास पहुंचने से पहले ही बस के अंदर जलने की गंध आ रही थी। यात्रियों ने स्टाफ को बार-बार आगाह किया, लेकिन ड्राइवर और कंडक्टर ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया। यात्रियों का यह भी आरोप है कि स्टाफ केबिन के अंदर बैठकर बीड़ी-सिगरेट पी रहा था, जिसने हादसे को और करीब ला दिया।

एसी में धमाका और दम घुटने से मौत

चीफ फायर ऑफिसर प्रदीप कुमार के अनुसार, शुरुआती जांच में आग लगने का कारण एसी सिस्टम में शॉर्ट सर्किट या धमाका माना जा रहा है। इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल ने आग को तेजी से पूरी बस में फैला दिया। अधिकतर यात्रियों की मौत जलने से ज्यादा धुएं के कारण दम घुटने से हुई है।

कानूनी कार्रवाई और सीएम की संज्ञान

पुलिस ने बस के ड्राइवर और कंडक्टर को हिरासत में ले लिया है। उनके खिलाफ लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

अब प्रशासन बस के फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट की गहनता से जांच कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बिना सुरक्षा मानकों के यह बस सड़कों पर कैसे दौड़ रही थी।

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