आज लेह में शहीद दिवस मनाया जा रहा है। पिछले साल 24 सितंबर को लद्दाख की संवैधानिक मांगों के लिए हुए हिंसक प्रदर्शनों में जान गंवाने वाले चार लोगों की याद में आज पूरा शहर बंद है। एनडीएस ग्राउंड में आयोजित रैली में मृतकों के परिजनों ने सरकार द्वारा घोषित 15 लाख रुपये के मुआवजे को नाकाफी बताते हुए नाराजगी जाहिर की है।
अशांति की जड़: छठी अनुसूची की मांग लद्दाख के लोग लंबे समय से केंद्रशासित प्रदेश में अपनी संस्कृति, जमीन और रोजगार के संरक्षण के लिए आंदोलित हैं। उनकी मुख्य मांगें पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में लद्दाख को शामिल करना है। आंदोलनकारियों का मानना है कि इससे स्थानीय स्वायत्तता सुनिश्चित होगी। 10 सितंबर 2025 से शुरू हुआ यह शांतिपूर्ण विरोध 24 सितंबर को हिंसक हो गया था।
कैसा था वह हिंसक दिन? पिछले साल के उस दिन स्थिति बेकाबू हो गई थी, जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। इस दौरान चार स्थानीय लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 पुलिस और सीआरपीएफ जवानों सहित 70 लोग घायल हुए। उपद्रव के दौरान करीब एक दर्जन वाहन जला दिए गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और अंततः फायरिंग का सहारा लेना पड़ा था। इस दौरान प्रसिद्ध शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी अनशन पर थे, जिसे हिंसा के बाद स्थगित करना पड़ा।
20 लोगों पर दर्ज मामले वापस शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 20 लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लेने की मंजूरी दे दी है। हिंसा के बाद पुलिस ने दंगा और आगजनी की धाराओं में 81 लोगों को गिरफ्तार किया था। लद्दाख पुलिस की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर सार्वजनिक व्यवस्था और शांति के हित में LG ने 20 आरोपियों को बड़ी राहत दी है।
मुआवजे पर जारी है असंतोष प्रशासन ने हिंसा में जान गंवाने वाले चार लोगों के परिजनों को 15 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल लोगों को 3 लाख और मामूली रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। हालांकि, स्थानीय समुदाय इसे बहुत कम मान रहा है और इसे लेकर रोष बरकरार है।
क्या है छठी अनुसूची और क्यों है जरूरी? भारतीय संविधान की छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के लिए स्वायत्तता की गारंटी देती है। इसके तहत बनने वाली स्वायत्त जिला परिषदें भूमि, वन, विवाह और सामाजिक रीति-रिवाजों पर कानून बना सकती हैं। लद्दाख के लोगों का मानना है कि इस अनुसूची में शामिल होने से बाहरी निवेश और भू-अतिक्रमण से उनकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी।
*#WATCH | Leh, Ladakh: A complete shutdown is being observed in Leh today as part of Shaheed Diwas (Martyrs Day).
— ANI (@ANI) September 24, 2026
The strike commemorates the first anniversary of the tragic September 24, 2025, violence in which four local residents lost their lives during massive protests… pic.twitter.com/roAlNiSlbe
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