क्या चुनाव आयोग की निष्पक्षता खत्म? गोवा CEO के ई-मेल पर कांग्रेस का बड़ा हमला
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नई दिल्ली: भारतीय चुनाव आयोग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आयोग में जरा भी नैतिकता बची है, तो ज्ञानेश कुमार को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

गोवा CEO के ई-मेल ने खोली पोल विवाद की जड़ एक मीडिया रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया है कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने ECINet सॉफ्टवेयर द्वारा हटाए गए वैध मतदाताओं को वापस सूची में शामिल करने के लिए सात दिनों में आठ बार चुनाव आयोग को ई-मेल भेजे थे। स्थानीय अधिकारियों (EROs) ने पुष्टि की थी कि हटाए गए नाम वैध थे, लेकिन आयोग ने इन अनुरोधों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

12 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप जयराम रमेश ने दावा किया कि ECINet सॉफ्टवेयर के जरिए पूरी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रणाली के तहत देश भर में करीब 12 करोड़ मतदाताओं के नाम या तो सूची से हटा दिए गए हैं या उन्हें संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। दिल्ली जैसे राज्यों में 54% मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है।

EROs के अधिकारों का हनन कांग्रेस का आरोप है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत मतदाता सूची पर अंतिम वैधानिक अधिकार निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) का होता है। हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में EROs की पहुंच सॉफ्टवेयर तक सीमित कर दी गई है। रमेश ने बताया कि खुद दो चुनाव आयुक्तों ने इस उल्लंघन को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की थी।

वोट चोरी पर राहुल गांधी की बात दोहराई जयराम रमेश ने राहुल गांधी के आरोपों को सही ठहराते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के साथ पूरी तरह समझौता किया गया है। उन्होंने इसे ज्ञानेश कुमार द्वारा लागू मोदी-मेथड ऑफ डिसइंफ्रांचाइजिंग इंडियंस (भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने का तरीका) करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं (Gen Z) को मतदाता सूची से बाहर करने के लिए नई पंजीकरण प्रक्रिया को जानबूझकर कठिन बनाया गया है।

नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। पार्टी का मानना है कि इन दुष्ट मंशाओं के लिए केवल ज्ञानेश कुमार ही नहीं, बल्कि सरकार को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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