मोहिंदर अमरनाथ: जेब में लाल रुमाल, तेज गेंदबाजों का खौफ और चयनकर्ताओं को जोकर बताने वाले जिमी का सफर
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नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ खिलाड़ी अपने रनों के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ अपने जीवट और साहस के लिए। मोहिंदर अमरनाथ उर्फ जिमी इसी दूसरी श्रेणी के सबसे बड़े स्तंभ हैं। 1983 के वर्ल्ड कप हीरो और बेखौफ अंदाज के मालिक जिमी आज (24 सितंबर) अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी पहचान जेब में रखे लाल रुमाल, घुंघराले बाल और दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों के सामने बिना हेलमेट के भी अडिग खड़े रहने से थी।

1983 वर्ल्ड कप: जब जिमी ने भारत को बनाया चैंपियन

25 जून 1983 का दिन भारतीय क्रिकेट के लिए स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। लॉर्ड्स के मैदान पर वेस्टइंडीज जैसी घातक टीम को हराकर भारत ने पहली बार विश्व कप जीता था। इस जीत के असली नायक मोहिंदर अमरनाथ थे। उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल दोनों मैचों में मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता। फाइनल में, जहाँ भारतीय बल्लेबाजी 183 रनों पर ढेर हो गई थी, वहां जिमी ने न केवल 26 रन बनाए, बल्कि गेंद से 12 रन देकर 3 विकेट चटकाकर वेस्टइंडीज की कमर तोड़ दी थी।

पाकिस्तान-वेस्टइंडीज का दौरा और अमरनाथ की बहादुरी

अमरनाथ का करियर कमबैक की कहानियों से भरा है। 1982-83 के पाकिस्तान दौरे से पहले उन्हें तीन साल तक टीम से बाहर रखा गया था। लेकिन सुनील गावस्कर के कहने पर उनकी वापसी हुई और उन्होंने इमरान खान जैसे दिग्गजों के सामने रनों का अंबार लगा दिया। इसके तुरंत बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ माइकल होल्डिंग और मैल्कम मार्शल जैसे खूंखार गेंदबाजों के सामने उनकी बल्लेबाजी आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है। वे भारत के सबसे बहादुर बल्लेबाजों में गिने गए।

जब चयनकर्ताओं को कहा बंच ऑफ जोकर्स

जिमी मैदान पर जितने शांत थे, ड्रेसिंग रूम के बाहर उतने ही बेबाक। 1988 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम से बाहर किए जाने के बाद उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तत्कालीन चयनकर्ताओं को सीधे तौर पर बंच ऑफ जोकर्स (मूर्खों का समूह) कह दिया था। यह बयान उस समय भारतीय क्रिकेट जगत में भूचाल ले आया था। यह घटना आज भी खेल पत्रकारिता और क्रिकेट इतिहास के पन्नों में एक प्रमुख विवाद के रूप में दर्ज है।

विरासत और आंकड़े

पटियाला में जन्मे मोहिंदर अमरनाथ भारत के पहले टेस्ट कप्तान लाला अमरनाथ के बेटे थे। पिता की बड़ी छाया के बावजूद, उन्होंने अपनी मेहनत से अलग पहचान बनाई।

वे केवल एक बल्लेबाज नहीं थे, बल्कि एक शानदार ऑलराउंडर भी थे, जिन्होंने गेंदबाजी में भी भारत को कई अहम सफलताएं दिलाईं। आज भी भारतीय क्रिकेट प्रेमी उन्हें एक ऐसे योद्धा के रूप में याद करते हैं, जिसने कभी भी हार मानना नहीं सीखा था।

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