UNGA में ट्रंप का अल्टीमेटम: ईरान के पास डील या विनाश चुनने का आखिरी मौका
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का तेवर बेहद आक्रामक नजर आया। दुनिया के सबसे बड़े मंच से ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि या तो वह शांति का रास्ता चुने या फिर पूरी तरह खत्म होने के लिए तैयार रहे।

आतंकवाद का नंबर एक स्पॉन्सर है ईरान

ट्रंप ने ईरान पर कड़ा प्रहार करते हुए उसे वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा, दुनिया की जान को खतरे में डालकर अपनी ताकत बढ़ाने वाले ईरान के खौफनाक इरादे किसी से छिपे नहीं हैं। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक है, जिसने पिछले 51 वर्षों से खून-खराबे और हत्याओं के जरिए राज किया है।

ट्रंप का दो टूक विकल्प: समझौता या अंत

ईरान को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने दो स्पष्ट रास्ते सुझाए। उन्होंने कहा, ईरान के पास दो विकल्प हैं: या तो वे किसी ऐसे समझौते पर बातचीत करें जिससे उनका देश फिर से खड़ा हो सके और तरक्की करे, या फिर मैं इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म कर दूं, और यह काम बहुत जल्दी किया जाएगा।

ट्रंप ने साफ किया कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उनके अनुसार, यह उनका संकल्प है जिस पर वह राजनीति में आने के पहले दिन से अडिग हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन

ईरान की हरकतों पर नकेल कसने का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट से 1 बिलियन बैरल से अधिक तेल सुरक्षित निकाला है। उन्होंने बताया कि युद्ध के तनाव के बावजूद हर दिन बड़ी संख्या में जहाजों को वहां से सुरक्षित निकाला जा रहा है। उन्होंने इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा ईरान के हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव को बहुमत से पास करने के लिए धन्यवाद भी दिया।

चुनाव के बाद बड़ी डील की उम्मीद

हालांकि, इन सख्त तेवरों के बीच ट्रंप ने संकेत दिया कि वह कूटनीति के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि चुनाव के ठीक बाद हम ईरान के साथ एक डील करेंगे। उनके लिए इससे समझदारी का कोई और रास्ता नहीं है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान उनके चुनाव परिणामों का इंतजार कर रहा है, तो ट्रंप ने साफ किया कि ईरान का मुद्दा उनके लिए चुनावी दांव-पेच से ऊपर है। उन्होंने कहा, ईरान के मामले में चुनाव की अहमियत मेरे लिए शून्य है। मेरे दिमाग में बस एक ही बात है—ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे।

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