शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सबसे बड़ा डर मार्केट टाइमिंग का होता है। निवेशक अक्सर इस असमंजस में रहते हैं कि क्या बाजार अपने रिकॉर्ड हाई पर है? कहीं निवेश करते ही बाजार गिर तो नहीं जाएगा? लेकिन, एक हालिया डेटा विश्लेषण साबित करता है कि बाजार के शिखर पर निवेश शुरू करने के बावजूद लंबी अवधि में करोड़पति बना जा सकता है।
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) बी. पद्मनाभन ने 2008 के मार्केट पीक का उदाहरण देते हुए SIP की ताकत को समझाया है। 8 जनवरी 2008 को जब सेंसेक्स करीब 20,873 के उच्चतम स्तर पर था, तब किसी ने ₹10,000 की मासिक SIP शुरू की। इसके तुरंत बाद वैश्विक मंदी आई और मार्च 2009 तक बाजार 60% तक लुढ़क गया। एकमुश्त निवेश करने वाले निवेशक जहां घबराकर बाहर निकल गए, वहीं SIP जारी रखने वाले निवेशकों के लिए यही गिरावट गोल्डन अपॉर्चुनिटी साबित हुई।
पद्मनाभन ने 18 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर बताया कि 225 किस्तों में कुल ₹22.50 लाख का निवेश हुआ। अलग-अलग फंड्स में इसका रिटर्न चौंकाने वाला रहा:
इन फंड्स ने सालाना 15% से 20% तक का रिटर्न दिया, जो साबित करता है कि बाजार की उठा-पटक से डरने के बजाय निवेश को समय देने में ही असली मुनाफा है।
SIP की सफलता के पीछे दो बड़े स्तंभ हैं:
विशेषज्ञों का मानना है कि SIP ऑल-वेदर इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी है। एकमुश्त निवेश में अगर आप गलत समय पर बाजार में उतरते हैं, तो नुकसान का जोखिम होता है। लेकिन SIP में निवेश अलग-अलग कीमतों पर होता है, जिससे एंट्री लेवल की चिंता खत्म हो जाती है। यह साबित करता है कि निवेश की सफलता बाजार की चाल पकड़ने में नहीं, बल्कि अनुशासन के साथ बने रहने में है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। दी गई जानकारी किसी विशेष म्यूचुअल फंड या निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
The purpose of this illustration is simple: Even if you started your SIP at the market s all-time high, you could still create meaningful wealth over the long term.
— B Padmanaban ([email protected]) (@padhucfp) September 21, 2026
SIP is an all-weather investment strategy. Volatility, when managed with discipline and patience, can create… pic.twitter.com/RHBQYZWjBW
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