संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को एक नई और मजबूत रफ्तार मिली है। यूरोप के चार प्रभावशाली देशों—स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक रिपब्लिक—ने एक सुर में भारत का समर्थन किया है। यह कदम वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है।
यूरोपीय देशों का स्पष्ट संदेश संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान विसेग्राड ग्रुप (V4) और भारत के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई। बैठक के बाद स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने स्पष्ट किया कि V4 के चारों देश भारत की दावेदारी के साथ एकजुट हैं।
उन्होंने कहा, ग्लोबल साउथ के प्रमुख प्रतिनिधि और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की उभरती हुई महाशक्ति होने के नाते, भारत का सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में होना अनिवार्य है। यह बयान वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रतीक है।
रणनीतिक सहयोग पर बनी सहमति विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक को एक ऐतिहासिक अवसर करार दिया है। भारत और V4 देशों ने न केवल राजनीतिक समर्थन की बात की, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का फैसला किया है।
दोनों पक्षों ने वार्षिक व्यापार मंच बनाने और प्रौद्योगिकी नवाचार (Technological Innovation) में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में पुराने मजबूत संबंधों को नए युग की जरूरतों के अनुसार आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया है।
क्यों जरूरी है सुरक्षा परिषद में सुधार? वर्तमान में UNSC की संरचना 1945 के दौर की है, जब दुनिया का स्वरूप आज से बिल्कुल अलग था। उस समय एशिया और अफ्रीका के अधिकांश देश औपनिवेशिक शासन के अधीन थे। आज भारत न केवल दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, बल्कि एक तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति भी है।
भारत आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है और शांति अभियानों में भी सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है। नई दिल्ली का तर्क साफ है: यदि सुरक्षा परिषद को आज की दुनिया में प्रासंगिक रहना है, तो इसका विस्तार और प्रतिनिधित्व का आधुनिकीकरण जरूरी है।
चीन का अड़ंगा बनाम बढ़ता वैश्विक समर्थन हालांकि चीन लंबे समय से भारत की स्थायी सदस्यता में अड़ंगे डालता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को मिल रहा समर्थन इस बात का संकेत है कि अब दुनिया भारत की उपेक्षा नहीं कर सकती। अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के पास वीटो पावर है, और अब यूरोपीय देशों का यह समर्थन भारत की दावेदारी को वैश्विक स्तर पर एक नई नैतिक और राजनीतिक वैधता प्रदान कर रहा है।
‘We all agree as V4 countries that India as a part of the Global South, upcoming superpower in the Indo-Pacific region, must be at the table as the permanent member of the UN Security Council’
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 21, 2026
- Foreign Minister Juraj Blanár of Slovakia after the first V4 + India FMM #UNGA81… pic.twitter.com/QwFsjlXWYC
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