सत्य निकेतन हादसा: सात मौतों का जिम्मेदार कौन? राहुल गांधी के तीखे सवालों से गरमाया सिस्टम
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दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस हादसे में सात लोगों की जान गई, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस त्रासदी को लेकर सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर सीधा हमला बोला है।

उस मासूम की क्या गलती थी? राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मध्यप्रदेश के देवास निवासी छात्र अर्पित जाज के परिवार से मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। अर्पित भी इसी हादसे में काल के गाल में समा गए थे। राहुल ने सवाल किया कि बेहतर भविष्य की तलाश में दिल्ली आए इन छात्रों का क्या दोष था? उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल बनाए होते, तो उन्हें जान जोखिम में डालकर असुरक्षित PG में रहने की मजबूरी नहीं होती।

जांच की सुई निर्माण में बदलाव पर हादसे की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 50 साल पुरानी इस इमारत के साथ छेड़छाड़ की गई थी। बेसमेंट में पानी जमा होने के बावजूद वहां निर्माण मलबा डाला जा रहा था और दुकान के लिए ग्राउंड फ्लोर की मुख्य दीवार तोड़ दी गई थी। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या इन्हीं संरचनात्मक बदलावों के कारण इमारत जमींदोज हुई।

आरोपियों पर कसा शिकंजा, अफसर निलंबित पुलिस ने इस मामले में मकान मालिक, लेबर कॉन्ट्रैक्टर और PG संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की है। मुख्य ऑपरेटर शुभम त्यागी ने आत्मसमर्पण कर दिया है और अब न्यायिक हिरासत में है। वहीं, लापरवाही बरतने के आरोप में MCD के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, सरकार को दी चेतावनी दिल्ली हाईकोर्ट ने इस त्रासदी को महज एक दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इसे आपराधिक आचरण करार देते हुए कहा कि छात्रों के सपनों को प्रशासनिक लापरवाही से कुचला गया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को है, जहां सिस्टम की जवाबदेही पर और भी कड़े रुख की उम्मीद है।

क्या कागजों से बाहर निकल पाएगी सुरक्षा? हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने शहर के सभी PG और हॉस्टलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य कर दिया है। 2,250 PG के सर्वे में 138 इमारतों में मरम्मत की जरूरत और चार को खतरनाक पाया गया है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ऑडिट केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा या वास्तव में छात्रों की जान सुरक्षित हो सकेगी?

सत्य निकेतन की सात मौतें अब एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन चुकी हैं। राहुल गांधी के सवालों ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन सवालों का जवाब देने के साथ-साथ दिल्ली में छात्रों के रहने की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित कर पाएगी।

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