UP चुनाव 2027: अखिलेश यादव का ‘27 हजार’ वाला मेगा प्लान, सत्ताधारी दल के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी की चुनावी रणनीति का खुलासा करते हुए एक नया गणित पेश किया है। रविवार को लखनऊ में हुई पार्टी की बैठक में उन्होंने हर विधानसभा सीट पर 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

सत्ताधारी दल के वोट बैंक में सेंधमारी अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि पार्टी की नजर उन परिवारों पर है जो पिछले कुछ वर्षों में अन्याय और अत्याचार का शिकार हुए हैं। सपा की रणनीति है कि ऐसे परिवारों को पार्टी से जोड़कर सीधे तौर पर सत्ताधारी दल के 27 हजार वोट कम किए जाएं। इसे सपा के मिशन 2027 की सबसे बड़ी चुनावी घेराबंदी माना जा रहा है।

PDA ऑडिट रिपोर्ट और बाबा साहब का मुद्दा बैठक में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की 7वीं ऑडिट रिपोर्ट भी जारी की गई। अखिलेश ने भाजपा पर बड़ा हमला करते हुए दावा किया कि 2017 से 2026 के बीच प्रदेश के 72 जिलों में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 151 से अधिक मूर्तियां तोड़ी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि मूर्तियों के जरिए संविधान पर चोट की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की गई है।

पेपर लीक और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा सपा अध्यक्ष ने युवाओं के भविष्य का मुद्दा उठाते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की वजह से लाखों युवाओं का सपना टूटा है और उनसे सरकारी नौकरियों के अवसर छीने गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण के साथ खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया।

अयोध्या से किसान तक, हर मुद्दे पर तीखे सवाल अखिलेश यादव ने अयोध्या में जमीन घोटालों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां बड़े पैमाने पर सरकारी और किसानों की जमीनों में हेराफेरी हुई है। उन्होंने मुआवजे और सर्किल रेट के मामले में भी प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और दावा किया कि मुख्यमंत्री का ध्यान जनता के मुद्दों के बजाय केवल अपने गृह जनपद तक सीमित रहा है।

चुनावी तैयारी: डिजिटल मोर्चे पर भी सपा सक्रिय 2027 की जंग के लिए सपा अब पूरी तरह आक्रामक मोड में है। एक तरफ जहां अखिलेश यादव जमीनी स्तर पर 27 हजार वोट वाला फॉर्मूला लेकर जनता के बीच जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। सपा की यह नई चुनावी रणनीति आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है।

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