हामिद अंसारी के हिंदू राष्ट्रवाद वाले बयान पर नकवी का पलटवार: बोले- भारत का सेक्युलरिज्म ही हमारी ताकत
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नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा हाल ही में दिए गए बयान पर भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नकवी ने साफ किया कि भारत की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाना न केवल गलत है, बल्कि यह देश को बांटने की एक सोची-समझी साजिश है।

नकवी ने क्या कहा? मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद भारत ने एक ऐसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने का रास्ता चुना, जहां सभी धर्मों के लोग समानता से रहते हैं। नकवी के अनुसार, भारत में हिंदू बहुसंख्यक हैं, इसीलिए देश का मिजाज सेक्युलर है। जो लोग समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, वे अपने नापाक मंसूबों में कभी सफल नहीं होंगे।

अंसारी ने क्या विवाद खड़ा किया था? यह विवाद 18 सितंबर को दिल्ली में हुए एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान शुरू हुआ। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने दिवंगत लेखक अब्दुल गफूर नूरानी की किताब का जिक्र करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से आरएसएस और हिंदू दक्षिणपंथ पर निशाना साधा था। उन्होंने नेहरू के विचारों को दोहराते हुए कहा था कि भारत के लिए साम्यवाद से बड़ा खतरा हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है।

नागरिक बनाम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद अपने भाषण में अंसारी ने नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच बहस को भी हवा दी। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में कुछ ऐसी प्रवृत्तियां उभरी हैं, जो चुनावी बहुमत को धार्मिक बहुमत में बदलने का प्रयास कर रही हैं। अंसारी के अनुसार, यह प्रवृत्ति नागरिकों के बीच भेदभाव और असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है, जिसका मुकाबला राजनीतिक और कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए।

सियासी बयानबाजी का दौर हामिद अंसारी के इस रुख पर भाजपा मुखर है। पार्टी का मानना है कि ऐसे बयान देश की छवि खराब करने और समाज को ध्रुवीकृत करने के उद्देश्य से दिए जाते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता भी अक्सर इसी तरह के मुद्दे उठाकर भाजपा और आरएसएस के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को घेरे में लेने की कोशिश करते हैं। राहुल गांधी भी समय-समय पर सरकारी सिस्टम पर आरएसएस के प्रभाव का आरोप लगाते रहे हैं।

फिलहाल, इस बयानबाजी ने देश में एक बार फिर सेक्युलरिज्म बनाम राष्ट्रवाद की वैचारिक बहस को तीव्र कर दिया है।

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