टाटा ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने टाटा समूह के भीतर चल रहे मौजूदा विवाद पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि टाटा जैसे प्रतिष्ठित समूह के लिए यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
व्यक्तिगत संबंध और दुख सिंघवी ने रतन टाटा और पूरे टाटा ग्रुप के साथ अपने पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के प्रमुख लोगों के साथ उनके गहरे और सम्मानजनक संबंध रहे हैं। इसी कारण इस विवाद का आपसी सहमति से समाधान न निकल पाना उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुखी करता है।
चैरिटी कमिश्नर की भूमिका पर सवाल सिंघवी ने चैरिटी कमिश्नर के हालिया फैसलों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस रहस्यमयी और अचानक तरीके से रोक लगाई गई है, वह ट्रस्ट के आंतरिक फैसलों में अनावश्यक बाधा डालता है, जो कि पूरी तरह से गलत और अनुचित है।
अधिकारों और वीटो नियमों का उल्लंघन वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच 100 साल पुराने संबंधों को अचानक अलग करने की कोशिश करना तर्कहीन है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के निर्णय लेने की प्रक्रिया में एकमत वाली शर्त और वीटो अधिकारों को नजरअंदाज करना कानूनी और सैद्धांतिक रूप से गलत है।
कानूनी लड़ाई ही एकमात्र रास्ता? सिंघवी ने स्पष्ट किया कि शेयरधारकों के अधिकारों को इस तरह खत्म करना, कॉर्पोरेट स्वामित्व के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि टाटा-मिस्त्री मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टाटा ट्रस्ट की सर्वोच्चता को बरकरार रखा था, लेकिन अब ऐसा लगता है कि उस फैसले को जानबूझकर भुलाया जा रहा है। उन्होंने माना कि आपसी सामंजस्य के अभाव में अब इसका समाधान केवल अदालत द्वारा ही संभव है।
क्या है टाटा समूह में विवाद की जड़? विवाद की शुरुआत टाटा संस के चेयरमैन की नियुक्ति से हुई है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसके कारण चेयरमैन की नियुक्ति में ट्रस्ट की भूमिका निर्णायक होती है।
हाल ही में बोर्ड में एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को लेकर खींचतान शुरू हुई। जहां बोर्ड के सदस्यों ने चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया, वहीं टाटा ट्रस्ट के प्रमुख नोएल टाटा ने इस नियुक्ति का विरोध किया है। रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा द्वारा ट्रस्ट का कार्यभार संभालने के बाद से ही वे समूह की प्रक्रियाओं और नियंत्रण को लेकर काफी सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिससे यह टकराव और गहरा गया है।
#WATCH | Delhi: On being appointed as an advocate for Tata Trusts, Senior Advocate and Congress MP Abhishek Manu Singhvi says, With the Tata Group and Ratan Tata—being aware of the legacy of that group, personally knowing the principal actors on both sides of this current Tata… pic.twitter.com/tTp76NnS3i
— ANI (@ANI) September 20, 2026
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