राजस्थान के खेरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम ने जब आदिवासी गांवों का दौरा किया, तो सामने आई सरकारी स्कूलों की तस्वीर ने प्रशासन की लापरवाही को बेनकाब कर दिया।
सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष राकां के नेतृत्व में टीम ने नयागांव तहसील के डेमाट, पोंगली और बाबरी गांवों का निरीक्षण किया। स्थिति बेहद गंभीर है—कहीं 70 बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ एक शिक्षक है, तो कहीं स्कूली इमारतें इतनी जर्जर हैं कि कभी भी गिर सकती हैं।
देमत के एक स्कूल में 15 अगस्त का संदेश आज भी बोर्ड पर लिखा है, क्योंकि पिछले एक महीने से वहां पढ़ाई ही नहीं हुई है। पीने का पानी, शौचालय और बुनियादी सुविधाओं का वहां दूर-दूर तक नामो-निशान नहीं है।
हालात इतने बदतर हैं कि अब ग्रामीण खुद अपनी जेब से पैसे इकट्ठा कर रहे हैं ताकि बच्चों के लिए न्यूनतम सुविधाएं जुटाई जा सकें। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने स्कूल के नाम पर जमीन तो ले ली, लेकिन बिल्डिंग बनाने की जहमत नहीं उठाई। कई गांवों में आज भी बच्चे खुले आसमान या खंडहरनुमा कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं।
सीजेपी ने सबसे बड़ा सवाल ट्राइबल एरिया डेवलपमेंट (TAD) बजट को लेकर उठाया है। पार्टी का आरोप है कि आदिवासी विकास के लिए आवंटित लगभग 1,500 करोड़ रुपये का बजट खर्च ही नहीं हो पाया और लैप्स हो गया।
कार्यकर्ताओं ने तीखा सवाल किया, सरकार यह क्यों नहीं बता रही कि आदिवासियों के लिए आया इतना बड़ा बजट खर्च क्यों नहीं किया जा रहा? क्या यह बजट छात्रों की शिक्षा और कल्याण के लिए नहीं है?
यह दौरा सीजेपी के आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान का हिस्सा है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ऐलान किया है कि उनकी टीम राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा और गुजरात के आदिवासी इलाकों में भी जमीनी हकीकत की जांच करेगी।
विशेष रूप से महाराष्ट्र में पिछले दो वर्षों में 590 से अधिक आदिवासी छात्रों की मौत के आंकड़ों ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। सीजेपी ने मांग की है कि टीएडी फंड का पारदर्शी इस्तेमाल हो और खाली पड़े प्लॉटों पर तुरंत स्कूल बिल्डिंग का निर्माण कराया जाए।
*खेरवाड़ा (उदयपुर) के देमत में राजकीय प्राथमिक आदिवासी स्कूल में 15 अगस्त का स्वतंत्रता दिवस का मेसेज आज भी लिखा हुआ है।
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) September 20, 2026
क्योंकि एक महीने से और कोई पढ़ाई ही नहीं हुई।
पूरी बिल्डिंग जर्जर। 70 बच्चों के लिए एक टीचर, दो जर्जर क्लासरूम। आंगनवाड़ी का कमरा कभी भी गिर सकता है। शौचालय… pic.twitter.com/jF1vOjTiDG
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