भाभी बनकर सियासी मैदान में उतरेंगी सुनेत्रा पवार! प्रशांत किशोर का सीक्रेट प्लान आया सामने
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महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। पार्टी अब अपनी कमान संभाल रहीं सुनेत्रा पवार को एक नई पहचान देने की तैयारी में है। हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर किसी री-लॉन्च से इनकार किया है, लेकिन अंदरखाने चल रही हलचल कुछ और ही इशारा कर रही है।

अजित दादा के बाद नई चुनौती साल की शुरुआत में अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक विरासत का पूरा भार सुनेत्रा पवार के कंधों पर आ गया। आज वह उपमुख्यमंत्री और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं। पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को दोबारा खड़ा करने और बिखरे हुए वोट बैंक को एकजुट करने की है।

हमारी भाभी से जुड़ेगा नया नैरेटिव सूत्रों की मानें तो पार्टी अपने पुराने नारे एकच वादा, अजित दादा से हटकर अब सुनेत्रा पवार पर केंद्रित एक नया अभियान छेड़ने की तैयारी में है। इस कैंपेन का नाम आपल्या वहिनी आहेत ना! (हमारी भाभी हैं ना!) बताया जा रहा है। इस स्लोगन के जरिए राज्य की महिला मतदाताओं के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव बनाने और सुनेत्रा पवार की सक्रियता को घर-घर तक पहुंचाने की योजना है।

प्रशांत किशोर की एंट्री से बढ़ी सुगबुगाहट इन अटकलों को तब और हवा मिली जब देश के मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार से एक बंद कमरे में मुलाकात की। चर्चा है कि इस बैठक में पार्टी की छवि सुधारने और महिला मतदाताओं को जोड़ने के लिए एक विस्तृत रणनीति पर चर्चा हुई। हालांकि, पार्टी नेताओं ने इसे महज एक शिष्टाचार भेंट करार दिया है।

27 सितंबर का नासिक सम्मेलन: क्या निकलेगा कोई बड़ा संकेत? पार्टी के भीतर और बाहर सभी की नजरें 27 सितंबर को होने वाले नासिक सम्मेलन पर टिकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी मंच से सुनेत्रा पवार की नई सियासी पारी का ऐलान हो सकता है। भले ही पार्टी नेतृत्व इसे खारिज कर रहा हो, लेकिन संगठन के भविष्य के लिए सुनेत्रा पवार की स्वीकार्यता बढ़ाना इस वक्त उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

पार्टी की आधिकारिक सफाई एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सुनेत्रा पवार पहले से ही एक सक्रिय नेता के रूप में काम कर रही हैं। वे रोजाना कार्यकर्ताओं से मिल रही हैं और जनता दरबार लगा रही हैं, इसलिए री-लॉन्च जैसी खबरों का कोई आधार नहीं है। पार्टी का जोर फिलहाल केवल संगठनात्मक मजबूती पर है।

अब देखना यह होगा कि नासिक का मंच वाकई कोई नया राजनीतिक अध्याय लिखता है या यह सिर्फ एक सामान्य सांगठनिक बैठक बनकर रह जाती है।

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