नासिक: आवारा कुत्तों पर शिवसेना नेता का अनोखा विरोध, नगर पंचायत अधिकारी की टेबल पर छोड़े पिल्ले
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महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के खिलाफ शिवसेना (उद्धव गुट) के युवासेना जिला प्रमुख विक्रम रंधावे ने विरोध का एक ऐसा तरीका अपनाया जो अब विवादों के घेरे में है। रंधावे अपने समर्थकों के साथ नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे और बोरियों में भरकर लाए गए आवारा पिल्लों को सीधे मुख्य अधिकारी की मेज पर छोड़ दिया।

रंधावे का तर्क: महीनों से अनसुनी शिकायतों का नतीजा विक्रम रंधावे ने अपने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि निफाड की हर गली में कुत्तों का आतंक है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 6 महीनों में शहर में करीब 900 से 1000 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हुए हैं। रंधावे के अनुसार, उन्होंने कई बार मुख्य अधिकारी (CO) को इस बारे में चेताया, लेकिन सात महीनों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अधिकारी का पलटवार: विरोध का तरीका संवेदनहीन निफाड नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी धीरज भामरे ने इसे एक सुनियोजित हंगामा करार दिया। भामरे ने कहा कि विरोध करने वाले लोग जबरदस्ती दफ्तर में घुसे और अभद्रता की। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत ने पिछले एक साल में 75 कुत्तों का वैक्सीनेशन और नसबंदी की है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में रिस्पॉन्स न मिलने के कारण काम धीमा पड़ा है। भामरे ने रंधावे के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जीवित प्राणियों को बोरी में भरकर लाना न केवल गलत था, बल्कि इससे कुत्तों की जान को भी खतरा हो सकता था।

जानवर भी परेशान, सियासत भी तेज इस घटना पर पशु अधिकार कार्यकर्ता विजय अंगारे ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध जायज है, लेकिन विरोध का तरीका बेहद गलत है। अंगारे ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए बेज़ुबान जानवरों का इस्तेमाल करना संवेदनहीनता है।

प्रशासन की अपील: नागरिकों को दी सलाह मुख्य अधिकारी धीरज भामरे ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों के लिए अस्थाई शेल्टर होम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने निफाड के नागरिकों से अपील की है कि वे सड़कों पर कहीं भी कुत्तों को खाना न खिलाएं, बल्कि इसके लिए निर्धारित स्थानों का ही उपयोग करें। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे प्रशासन की नाकामी और नेताओं के अतिवादी विरोध प्रदर्शन के बीच का एक अनसुलझा विवाद मान रहे हैं।

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