अन्नामलाई का पेरियार प्रेम: भाजपा छोड़ते ही क्या बदल गई विचारधारा? पुरानी धार्मिक छवि ने घेरा
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चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। भाजपा से अलग होने के बाद उनके राजनीतिक रुख में आए बदलाव ने न केवल उनके समर्थकों को चौंकाया है, बल्कि उन्हें पुराने आलोचकों के निशाने पर भी ला दिया है।

पेरियार पर पोस्ट से सियासत गरमाई गुरुवार को द्रविड़ कड़गम के संस्थापक पेरियार ई.वी. रामासामी की जयंती के अवसर पर अन्नामलाई ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने पेरियार को सामाजिक सुधारों का प्रणेता बताते हुए लिखा कि उन्होंने असमानता और अंधविश्वास के खिलाफ लड़कर राज्य का राजनीतिक इतिहास बदल दिया।

2020 के बाद पहली बार याद किया अन्नामलाई का यह कदम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय इसलिए है क्योंकि 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद से उन्होंने कभी पेरियार की जयंती पर सार्वजनिक शुभकामना नहीं दी थी। भाजपा से बाहर आते ही उनका यह बदलाव अब लोगों को रास नहीं आ रहा है।

आलोचकों ने पूछा- क्या हिंदू रीति-रिवाज अंधविश्वास हैं? अन्नामलाई के इस पोस्ट पर यूजर्स ने तीखे सवाल किए हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि जब वह भाजपा में थे, तब धार्मिक रीति-रिवाजों में पूरी तरह डूबे रहते थे, तो अब पेरियार की विचारधारा का समर्थन कैसे कर रहे हैं? कई लोगों ने इसे दोहरा मापदंड बताया है।

अजीत भारती ने भाजपा पर भी कसा तंज यूट्यूबर अजीत भारती ने भी इस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि तमिलनाडु की राजनीति ऐसी है कि यहाँ पेरियार के सामने नतमस्तक हुए बिना गुजारा नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा समर्थकों को अन्नामलाई पर सवाल नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि भाजपा खुद भी कई बार पेरियार की विचारधारा के सामने झुकती हुई नजर आई है।

पुराना वीडियो वायरल: कोड़े मारने वाली घटना पर सवाल पेरियार के समर्थन के साथ ही सोशल मीडिया पर अन्नामलाई का 2024 का एक पुराना वीडियो वायरल हो गया है। इसमें वह कोयंबटूर में खुद को कोड़े मारते हुए नजर आ रहे हैं। तब उन्होंने इसे भगवान मुरुगन को भेंट और तमिल परंपरा बताया था।

अब नेटिजन्स इसी वीडियो को आधार बनाकर पूछ रहे हैं कि जो व्यक्ति स्वयं को कोड़े मारकर धार्मिक आस्था का प्रदर्शन कर रहा था, वह अब पेरियार के अंधविश्वास विरोधी एजेंडे को कैसे सही ठहरा सकता है। यह विरोधाभास फिलहाल अन्नामलाई की नई राजनीतिक पारी के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।

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