अखिलेश की भगवा बस और पीडीए का नया समीकरण: 2027 के लिए सपा का बड़ा दांव
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उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी बिसात बिछा दी है। भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने न केवल एक नए राजनीतिक अवतार में एंट्री की, बल्कि अपनी भविष्य की रणनीति का भी स्पष्ट खाका खींच दिया है।

भगवान विश्वकर्मा पर सपा की नजर लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने घोषणा की कि यदि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो रिवर फ्रंट पर भगवान विश्वकर्मा का भव्य मंदिर बनाया जाएगा और उनकी जयंती पर सरकारी अवकाश घोषित किया जाएगा। इसे विशेषज्ञों द्वारा ओबीसी (OBC) वोट बैंक को साधने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पीडीए का नया विस्तार: अब मुस्लिम पर जोर सपा के चुनावी अभियान के केंद्र में पीडीए (PDA) है। अब तक इसे पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के रूप में परिभाषित किया जाता था, लेकिन अब नई भगवा रंग की बस पर पीडीए का फुल फॉर्म स्पष्ट रूप से पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और मुस्लिम के रूप में लिखा गया है। पार्टी ने अल्पसंख्यक शब्द के साथ मुस्लिम को जोड़कर किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति को खत्म करने की कोशिश की है।

क्या है इस भगवा बस की खासियत? लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय पहुंची यह भगवा रंग की बस पार्टी के आगामी अभियान का मुख्य चेहरा होगी। बस के एक तरफ अखिलेश यादव के साथ सामाजिक न्याय का परचम लहराएगा, PDA ही परिवर्तन लाएगा का नारा है, तो दूसरी तरफ संस्थापक मुलायम सिंह यादव की तस्वीर के साथ इसे एक सामाजिक आंदोलन बताया गया है। बस पर डॉ. भीमराव अंबेडकर, राम मनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र जैसे दिग्गजों की तस्वीरें भी अंकित हैं।

विपक्ष का हमला और सपा का आत्मविश्वास अखिलेश यादव के इस पीडीए फॉर्मूले पर जयंत चौधरी समेत एनडीए के सहयोगियों ने निशाना साधा है। जयंत चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी नेता आखिर जाति का चश्मा कब उतारेंगे? हर चीज में जाति ढूंढना उचित नहीं है। वहीं, सपा इस फॉर्मूले को 2024 के लोकसभा चुनाव की अपनी सफलता का आधार मान रही है, जहां पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 37 सीटें जीतकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया था।

अक्टूबर से शुरू होगी रथ यात्रा अखिलेश यादव अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत करेंगे। 2027 के चुनाव से पहले यह रथ यात्रा सपा के लिए करो या मरो की स्थिति होगी। आकाश आनंद को पार्टी में शामिल करने के सवाल पर अखिलेश यादव ने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा, लेकर आइए, हम ले लेंगे, जो यह दर्शाता है कि सपा गठबंधन और विस्तार की संभावनाओं के लिए भी दरवाजे खुले रख रही है।

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