दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मुस्लिम महिला पत्रकार करिश्मा अजीज की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अदालत ने दिल्ली साइबर पुलिस को पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया है। यह कार्रवाई उन आरोपों के बाद की गई है, जिनमें उन पर हिंदू संतों और धार्मिक हस्तियों का अपमान करने का आरोप है।
क्या है पूरा मामला? यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मृदुल गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट की वकील अमिता सचदेवा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि करिश्मा अजीज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X का उपयोग भारत-विरोधी भावनाएं फैलाने और हिंदू धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंचाने के लिए किया है।
किन प्रमुख हस्तियों पर की गई टिप्पणी? शिकायत के अनुसार, पत्रकार ने भगवान श्री राम, जगद्गुरु रामभद्राचार्य, वीर सावरकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ न केवल अपमानजनक पोस्ट किए, बल्कि मुगल अत्याचारों का महिमामंडन भी किया। कोर्ट में इन पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट, वीडियो लिंक और ट्रांसक्रिप्ट सबूत के तौर पर पेश किए गए हैं।
कोर्ट ने जांच को माना आवश्यक अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा दी गई सामग्री और लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, यह मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन आरोपों की गहन जांच करना अनिवार्य है। हालांकि, जज ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी यह आदेश केवल जांच के लिए है और अदालत ने अभी आरोपों की सच्चाई या मेरिट पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
सत्य और धर्म की जीत : वकील अमिता सचदेवा अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने इसे धर्म और सत्य की जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार दिल्ली साइबर पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश मिल गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि अजीज के सोशल मीडिया अकाउंट से लगातार सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली सामग्री परोसी जा रही थी।
अब साइबर पुलिस को अदालत के आदेश के तहत नियमानुसार कार्रवाई शुरू करनी होगी। इस मामले ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी बनाम धार्मिक भावनाओं के सम्मान की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है।
*Court Directs Registration of FIR Against Karishma Aziz (@KarishmaAziz_)
— Amita Sachdeva, Advocate (@SachdevaAmita) September 17, 2026
With the grace of Bhagwan Shri Krishna, I am pleased to share this good news.
Today, the Ld. CJM, Patiala House Courts, New Delhi, allowed our application under Section 175(3) BNSS and directed the SHO,… pic.twitter.com/ImQ5AgC93S
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